नई दिल्ली, 29 अगस्त 2026: उज़्बेकिस्तान में हिंदी भाषा सीखने के प्रति लोगों की रुचि लगातार बढ़ रही है. ताशकंद और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में छात्र और दूसरे लोग हिंदी का अध्ययन कर रहे हैं. इंडोलॉजिस्ट बायोत रखमतोव ने डीडी न्यूज से बातचीत में उज़्बेकिस्तान में हिंदी की पढ़ाई, इसके बढ़ते दायरे और भारत-उज़्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर जानकारी साझा की.
रखमतोव के अनुसार, उज़्बेकिस्तान में हिंदी पढ़ाने का सिलसिला 1947 में भारत की स्वतंत्रता के साथ शुरू हुआ था. उस समय ताशकंद के चार स्कूलों में हिंदी की पढ़ाई शुरू की गई थी. इसके बाद धीरे-धीरे हिंदी को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी जगह मिली और इसका अध्ययन करने वाले छात्रों की संख्या बढ़ती गई.
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1947 से शुरू हुआ हिंदी पढ़ाई का सिलसिला
रखमतोव ने बताया कि भारत की स्वतंत्रता के समय यानी 1947 में उज़्बेकिस्तान में हिंदी शिक्षण की शुरुआत हुई थी. शुरुआती दौर में ताशकंद के चार स्कूलों में हिंदी पढ़ाई जाती थी.
ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर स्थित स्कूल नंबर 24 में आज भी हिंदी की पढ़ाई नियमित रूप से जारी है. यह संस्थान उज़्बेकिस्तान में हिंदी शिक्षण की पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाने वाले स्कूलों में शामिल है.
यूनिवर्सिटी में भी बढ़ा हिंदी का दायरा
इंडोलॉजिस्ट बायोत रखमतोव के मुताबिक शुरुआती वर्षों में भाषा विज्ञान विभाग में करीब 50 छात्र हिंदी सीखते थे. बाद में ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज़ के गठन के साथ हिंदी की पढ़ाई का दायरा बढ़ा.
अब हिंदी सिर्फ language faculty तक सीमित नहीं है. विश्वविद्यालय में दर्शनशास्त्र, फिलोलॉजी, इतिहास और पत्रकारिता जैसे विभागों के छात्र भी हिंदी पढ़ रहे हैं.
इससे हिंदी सीखने वालों का दायरा अलग-अलग academic disciplines तक पहुंच गया है.
यूनिवर्सिटी में 250 से अधिक छात्र सीख रहे हिंदी
रखमतोव के अनुसार, University of Oriental Studies में अब 250 से अधिक छात्र हिंदी सीख रहे हैं.
अगर स्कूलों में हिंदी पढ़ने वाले छात्रों को भी इसमें शामिल किया जाए, तो हिंदी सीखने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो जाती है. यह आंकड़ा सिर्फ एक संस्थान तक सीमित नहीं है, बल्कि उज़्बेकिस्तान में स्कूल और higher education के स्तर पर हिंदी की मौजूदगी को दिखाता है.
ताशकंद और आसपास 1,500 से 2,000 लोग सीख रहे हिंदी
रखमतोव ने बताया कि ताशकंद और आसपास के इलाकों में कुल मिलाकर करीब 1,500 से 2,000 लोग सक्रिय रूप से हिंदी सीख रहे हैं.
इनमें स्कूल के छात्र, विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी और अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि से जुड़े लोग शामिल हैं. हिंदी की पढ़ाई का यह विस्तार इस बात की ओर इशारा करता है कि उज़्बेकिस्तान में भारतीय भाषा और संस्कृति के प्रति रुचि बनी हुई है.
सिर्फ भाषा नहीं, भारतीय संस्कृति से भी जुड़ाव
हिंदी के अध्ययन को केवल language learning तक सीमित नहीं माना जा रहा. रखमतोव के मुताबिक, भाषा और संस्कृति के आदान-प्रदान से भारत और उज़्बेकिस्तान के लोगों के बीच संबंध मजबूत हो रहे हैं.
भाषा के जरिए विद्यार्थी भारतीय समाज, संस्कृति और परंपराओं से भी जुड़ते हैं. इसी तरह भारत के लोगों के लिए भी उज़्बेकिस्तान की भाषा और संस्कृति को समझने के अवसर बढ़ते हैं.
यह people-to-people connection दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है.
उज़्बेकिस्तान में योग का आकर्षण भी बढ़ रहा
बायोत रखमतोव ने यह भी बताया कि हिंदी के साथ-साथ उज़्बेकिस्तान में योग के नए केंद्र स्थापित हो रहे हैं.
उनके अनुसार, योग की बढ़ती मौजूदगी भी भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच जन-दर-जन संपर्क को मजबूत करने में मदद कर रही है. हिंदी और योग जैसे cultural links के जरिए दोनों देशों के लोगों के बीच सीधा जुड़ाव बढ़ रहा है.
इससे भारत की भाषा और संस्कृति के प्रति उज़्बेकिस्तान में रुचि के अलग-अलग पहलू सामने आते हैं.
हिंदी सीखने के लिए बढ़ रही रुचि
उज़्बेकिस्तान में हिंदी पढ़ाई की यात्रा करीब आठ दशक पुरानी है. 1947 में कुछ स्कूलों से शुरू हुआ यह सिलसिला अब universities के अलग-अलग departments और बड़ी संख्या में students तक पहुंच चुका है.
ताशकंद और आसपास के क्षेत्रों में 1,500 से 2,000 लोगों के हिंदी सीखने की जानकारी इस बढ़ती रुचि को सामने रखती है. वहीं, विश्वविद्यालय स्तर पर हिंदी का अध्ययन भाषा से जुड़े विषयों के अलावा दर्शन, इतिहास और पत्रकारिता जैसे क्षेत्रों तक पहुंच गया है.
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यह स्थिति हिंदी को उज़्बेकिस्तान में एक ऐसी भाषा के रूप में दिखाती है, जिसका अध्ययन भारतीय भाषा और संस्कृति को समझने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच लोगों के संपर्क को बढ़ाने में भी भूमिका निभा रहा है.
रखमतोव के मुताबिक, भाषा और संस्कृति का यह आदान-प्रदान भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच संबंधों को और मजबूत करने में मदद कर रहा है.


