Mumbai 4.0 project: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई पर बढ़ते आबादी और इंफ्रास्ट्रक्चर के दबाव को कम करने के लिए अब मुंबई के अगले विस्तार की तैयारी तेज हो गई है. मुंबई 3.0 के बाद अब ‘मुंबई 4.0’ का खाका पालघर जिले में तैयार किया जा रहा है. प्रस्तावित क्षेत्र में वसई-विरार बेल्ट के साथ बोईसर, पालघर, दहाणू और वधावन जैसे इलाके शामिल होंगे. मुंबई 4.0 को आधुनिक औद्योगिक, व्यापारिक और लॉजिस्टिक्स हब के तौर पर विकसित करने की योजना है. इस क्षेत्र में वधावन का मेगा पोर्ट, प्रस्तावित एयरपोर्ट, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन, एक्सप्रेसवे और मल्टीमॉडल कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाएं इसे मुंबई महानगर क्षेत्र के एक अहम आर्थिक केंद्र में बदल सकती हैं.
यूपी एक्सप्रेसवे पर बड़ा बदलाव, अब एक नंबर से मिलेगी हर मदद
मुंबई 1.0 से मुंबई 4.0 तक कैसे बढ़ा शहर?
मुंबई के विस्तार को अलग-अलग चरणों में देखा जा रहा है. मुंबई 1.0: दक्षिण और मध्य मुंबई के साथ बांद्रा, अंधेरी, बोरीवली, जुहू, कुर्ला, घाटकोपर, मुलुंड, दादर, माटुंगा और परेल जैसे इलाके. मुंबई 2.0: नवी मुंबई को मुंबई के बड़े विस्तार के तौर पर देखा जाता है. वाशी, नेरुल, खारघर, सीवुड्स और पनवेल इसके प्रमुख इलाके हैं. मुंबई 3.0: रायगढ़ जिले के पनवेल, उरण और पेन तालुका के 124 गांवों को मिलाकर करीब 323 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में तीसरे मुंबई का खाका तैयार किया गया है. यह क्षेत्र नवी मुंबई एयरपोर्ट और अटल सेतु से जुड़ा है. मुंबई 4.0: पालघर जिले के वधावन, दहाणू, बोईसर, पालघर और वसई-विरार बेल्ट को जोड़कर नए आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की परिकल्पना है.
पालघर क्यों बन रहा है मुंबई 4.0 का केंद्र?
पालघर जिला मुख्यालय मुंबई से करीब 87 किलोमीटर दूर है, लेकिन जिले की दक्षिणी सीमा मुंबई और ठाणे महानगर क्षेत्र से लगी हुई है. वसई-विरार पहले से ही मुंबई महानगर से सीधे जुड़ा है और यहां मुंबई लोकल ट्रेन की कनेक्टिविटी भी है. पालघर में औद्योगिक गतिविधियां, लॉजिस्टिक्स और निर्यात से जुड़े कारोबार तेजी से बढ़ रहे हैं. बोईसर और तारापुर पहले से ही बड़े औद्योगिक क्षेत्र हैं, जबकि वधावन पोर्ट जैसी परियोजनाएं इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं.
वधावन पोर्ट बनेगा सबसे बड़ा गेमचेंजर
पालघर के चिंचानी बीच क्षेत्र में वधावन पोर्ट विकसित किया जा रहा है. यह जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी (JNPA) और महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड की परियोजना है. करीब 76,220 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित होने वाले इस ग्रीनफील्ड पोर्ट का क्षेत्रफल लगभग 1,448 हेक्टेयर बताया गया है. करीब 20 मीटर गहरे ड्राफ्ट के कारण यहां बड़े समुद्री जहाजों को संभालने की क्षमता होगी. इसकी क्षमता JNPA से कई गुना अधिक होने की योजना है. परियोजना के पूरा होने के बाद पालघर को देश के प्रमुख समुद्री व्यापार और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में शामिल करने की उम्मीद है. इससे बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं.
भारत का पहला ऑफशोर एयरपोर्ट भी प्रस्तावित
मुंबई 4.0 की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक पालघर क्षेत्र में प्रस्तावित ऑफशोर एयरपोर्ट है. समुद्र में विकसित होने वाला यह एयरपोर्ट क्षेत्र की एयर कनेक्टिविटी को नया आयाम दे सकता है. प्रस्तावित एयरपोर्ट को वधावन पोर्ट, बुलेट ट्रेन, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और प्रमुख एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है. इससे पालघर को एक बड़े मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है.
बुलेट ट्रेन से मुंबई की दूरी होगी और कम
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भी पालघर के विकास में अहम भूमिका निभाएगा. बोईसर में बुलेट ट्रेन स्टेशन प्रस्तावित है. इसके चालू होने के बाद बोईसर से मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) तक की यात्रा काफी कम समय में पूरी होने की उम्मीद है. बुलेट ट्रेन परियोजना की कई महत्वपूर्ण सुरंगें पालघर जिले में हैं. इस कॉरिडोर में ठाणे क्रीक के नीचे बनने वाली करीब 7 किलोमीटर लंबी समुद्र के नीचे की रेल सुरंग भी शामिल है.
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और मल्टीमॉडल कॉरिडोर से मिलेगी रफ्तार
मुंबई 4.0 की कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए कई सड़क परियोजनाओं को भी जोड़ा जा रहा है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के वडोदरा-मुंबई हिस्से की कनेक्टिविटी पालघर क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण होगी. इसके अलावा विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर भी इस पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा. इससे मुंबई, नवी मुंबई, पालघर और रायगढ़ के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है.
नारंगी क्रीक ब्रिज से वसई-विरार और पालघर के बीच सीधा संपर्क
MMRDA की नारंगी क्रीक ब्रिज परियोजना भी इस क्षेत्र के लिए अहम है. करीब 4 किलोमीटर लंबे इस पुल के जरिए वसई-विरार को पालघर और बोईसर की ओर सीधे जोड़ने की योजना है. इससे मौजूदा सड़क मार्ग की दूरी और यात्रा समय कम होने की उम्मीद है. वहीं उत्तन-विरार सी-लिंक भी मुंबई और पालघर क्षेत्र के बीच समुद्री कनेक्टिविटी को मजबूत करने वाली बड़ी परियोजना होगी.
बनेगा बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर
पालघर, तारापुर, बोईसर और वधावन को जोड़कर एक बड़ा मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित करने की योजना है. बोईसर में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार और नई टाउनशिप के विकास से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है. वधावन पोर्ट, बुलेट ट्रेन, एक्सप्रेसवे, फ्रेट कॉरिडोर, मल्टीमॉडल कॉरिडोर और प्रस्तावित एयरपोर्ट जैसी परियोजनाएं एक-दूसरे से जुड़कर इस क्षेत्र को देश के बड़े व्यापारिक केंद्रों में बदल सकती हैं.
2000 करोड़ का प्लान तैयार, नोएडा में बनेगा डबलडेकर फ्लाईओवर
मुंबई की भीड़ का नया विकल्प बनेगा पालघर
मुंबई महानगर क्षेत्र के लगातार विस्तार और शहर पर बढ़ते दबाव के बीच पालघर को नए आर्थिक केंद्र के तौर पर विकसित करने की कोशिश की जा रही है. अगर प्रस्तावित और निर्माणाधीन परियोजनाएं तय योजना के मुताबिक पूरी होती हैं, तो मुंबई 4.0 सिर्फ एक नया शहर नहीं बल्कि पोर्ट, एयरपोर्ट, उद्योग, हाई-स्पीड रेल और एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला एक विशाल आर्थिक कॉरिडोर बन सकता है. यही वजह है कि पालघर आने वाले वर्षों में मुंबई महानगर क्षेत्र के सबसे तेजी से बदलते इलाकों में शामिल हो सकता है.


