देहरादून, 31 अगस्त 2026: उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने monitoring और disaster management व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए हैं. आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने ग्लेशियर झीलों की real-time monitoring के लिए अत्याधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर जोर दिया है.
मदन कौशिक ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर ग्लेशियर झीलों की स्थिति और उनसे जुड़े संभावित जोखिम की समीक्षा की. उन्होंने अधिकारियों को satellite imagery, drones, remote sensing और sensor-based systems के इस्तेमाल के निर्देश दिए हैं.
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Satellite और Drone से होगी ग्लेशियर झीलों की निगरानी
राज्य में संवेदनशील ग्लेशियर झीलों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के लिए आधुनिक technology का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके तहत satellite imagery, drones, remote sensing और sensor-based systems को monitoring व्यवस्था में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं.
इन तकनीकों के जरिए ग्लेशियर झीलों की स्थिति और संभावित जोखिम से जुड़ी जानकारी लगातार जुटाने का प्रयास किया जाएगा. सरकार का फोकस ऐसी झीलों की निगरानी को ज्यादा व्यवस्थित और real-time बनाने पर है.
संवेदनशील झीलों पर Early Warning System
मदन कौशिक ने संवेदनशील ग्लेशियर झीलों पर जरूरत के अनुसार Early Warning System स्थापित करने को कहा है.
इसका उद्देश्य संभावित जोखिम की स्थिति में समय रहते warning mechanism तैयार रखना है. किन झीलों पर ऐसे सिस्टम लगाए जाएंगे, इसका निर्धारण उनकी संवेदनशीलता और जोखिम के आधार पर किया जाएगा.
ग्लेशियर झीलों की स्थिति पर लगातार नजर रखने के साथ early warning व्यवस्था को disaster preparedness का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की योजना है.
लगातार बारिश के बीच आपदा तैयारियों की समीक्षा
राज्य में लगातार बारिश के बीच आपदा प्रबंधन मंत्री ने प्रदेश की overall preparedness की भी समीक्षा की.
अधिकारियों को नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं. इसके अलावा संवेदनशील स्थानों पर JCB और दूसरी जरूरी machinery की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है.
बारिश के दौरान किसी भी आपात स्थिति में तत्काल response के लिए जरूरी संसाधनों को पहले से तैयार रखने पर जोर दिया गया है.
बंद सड़कों को प्राथमिकता से खोलने के निर्देश
बारिश के कारण यदि सड़कें बंद होती हैं तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर खोलने के निर्देश दिए गए हैं.
इसके लिए संवेदनशील locations पर JCB और अन्य machinery को तैनात रखने को कहा गया है, ताकि सड़क संपर्क बाधित होने की स्थिति में restoration work जल्द शुरू किया जा सके.
इस व्यवस्था का उद्देश्य आपदा या भारी बारिश के दौरान प्रभावित क्षेत्रों तक जरूरी सेवाओं और राहत-बचाव टीमों की पहुंच बनाए रखना है.
भारी बारिश में यात्रा संचालन मौसम देखकर
अधिकारियों को भारी बारिश के दौरान weather और route condition को ध्यान में रखते हुए यात्रा संचालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं.
इसका मतलब है कि खराब मौसम या रास्ते की स्थिति अनुकूल नहीं होने पर यात्रा से जुड़े फैसले स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर लिए जाएंगे. प्रशासन को लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है.
गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों की विशेष निगरानी
आपदा तैयारियों की समीक्षा के दौरान vulnerable लोगों की विशेष निगरानी पर भी जोर दिया गया.
निर्देशों के अनुसार गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. जरूरत की स्थिति में ऐसे लोगों तक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए प्रशासन को तैयार रहने को कहा गया है.
इसके साथ ही किसी communication disruption की स्थिति से निपटने के लिए वैकल्पिक संचार व्यवस्था तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं.
डेंगू रोकथाम के लिए Fogging और Anti-Larva अभियान
लगातार बारिश के बीच डेंगू की रोकथाम के लिए भी अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं.
इसके तहत fogging और anti-larva अभियान चलाने के साथ अस्पतालों में जरूरी दवाओं और beds की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है.
इससे बारिश के मौसम में डेंगू के संभावित मामलों से निपटने के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था को तैयार रखने पर जोर दिया गया है.
Disaster Management में Technology का बढ़ता इस्तेमाल
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में ग्लेशियर झीलों और अचानक बदलने वाली प्राकृतिक परिस्थितियों की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इसी को देखते हुए सरकार monitoring व्यवस्था में technology का इस्तेमाल बढ़ाने पर जोर दे रही है.
Satellite imagery, drones, remote sensing और sensors के जरिए information collection और monitoring को मजबूत करने की योजना है. संवेदनशील झीलों पर early warning systems लगाने का निर्देश भी इसी preparedness का हिस्सा है.
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कई मोर्चों पर एक साथ तैयारी
राज्य सरकार की इस समीक्षा में सिर्फ ग्लेशियर झीलों की monitoring ही नहीं, बल्कि बारिश, नदी जलस्तर, सड़क संपर्क, यात्रा संचालन, communication और health preparedness जैसे कई मुद्दों को शामिल किया गया.
प्रशासन को 24 घंटे river monitoring, sensitive locations पर machinery की उपलब्धता और बंद सड़कों को जल्द खोलने के निर्देश दिए गए हैं. वहीं vulnerable groups और डेंगू रोकथाम को लेकर भी अलग से preparedness बढ़ाने को कहा गया है.
फिलहाल सरकार का जोर संभावित आपदा से पहले monitoring और response system को मजबूत करने पर है. ग्लेशियर झीलों की real-time monitoring के लिए आधुनिक तकनीक और संवेदनशील स्थानों पर early warning व्यवस्था इसी तैयारी का हिस्सा है.


