दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG इमारत गिरने की दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन ने आसपास की जर्जर और असुरक्षित इमारतों पर कार्रवाई तेज कर दी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को बताया कि हादसे में ढही इमारत के ठीक बगल में मौजूद एक भवन को भी खतरनाक घोषित किया गया है. इस इमारत को बुधवार यानी 9 सितंबर को गिराया जाएगा.
सत्य निकेतन में 6 सितंबर को एक बहुमंजिला इमारत ढह गई थी. यह भवन छात्रों के लिए PG के तौर पर इस्तेमाल हो रहा था. हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जबकि 12 लोगों को मलबे से घायल अवस्था में बाहर निकाला गया. घटना के बाद इलाके में मौजूद दूसरी इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं.
यह भी पढ़ें- PM मोदी के कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा में सेंध! PMO अधिकारी बनकर पहुंचा 24 वर्षीय युवक, बॉडीगार्ड के पास मिली बंदूक
बगल की इमारत को घोषित किया गया खतरनाक
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को बताया कि हादसे वाली इमारत के ठीक पास मौजूद एक अन्य भवन की जांच की गई. जांच के बाद उसे असुरक्षित घोषित कर दिया गया है. अब इस इमारत को बुधवार को गिराने की तैयारी है.
MCD के अधिकारियों के मुताबिक यह इमारत कमजोर स्थिति में थी. सुरक्षा के लिए इसके आसपास लोहे के गार्ड लगाए गए थे. अधिकारियों ने बताया कि भवन को चरणबद्ध तरीके से गिराने की कार्रवाई की जाएगी, ताकि आसपास के लोगों और दूसरी संपत्तियों को नुकसान से बचाया जा सके.
हादसे के बाद 62 इमारतों पर नजर
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में खतरनाक इमारतों को लेकर व्यापक स्तर पर कार्रवाई शुरू हुई है. उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक राजधानी में 62 इमारतों को खतरनाक श्रेणी में चिन्हित किया गया है. इनमें से 16 इमारतों को गिराया जा चुका है, जबकि चार को सील किया गया है. बाकी भवनों पर उनकी स्थिति के आधार पर कार्रवाई की जानी है.
प्रशासन की ओर से खास तौर पर उन इलाकों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां बड़ी संख्या में छात्र PG या हॉस्टल में रहते हैं. दिल्ली में सभी PG आवासों और कोचिंग सेंटरों के सुरक्षा ऑडिट का भी आदेश दिया गया है. इसका उद्देश्य ऐसी इमारतों की पहचान करना है जिनकी संरचना कमजोर है या जिनमें निर्माण नियमों का उल्लंघन हुआ है.
हादसे वाली इमारत को लेकर FIR में गंभीर आरोप
सत्य निकेतन में जिस इमारत के गिरने से सात लोगों की जान गई, उसके निर्माण और इस्तेमाल को लेकर पुलिस जांच जारी है. FIR में आरोप लगाया गया है कि पुरानी इमारत पर अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं, जबकि उसकी नींव पर अतिरिक्त भार को लेकर सवाल थे. पुलिस के अनुसार हादसे से पहले इमारत में निर्माण कार्य भी चल रहा था.
पुलिस के मुताबिक इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए PG के रूप में किया जा रहा था. हादसे से पहले बेसमेंट में भी काम चलने की बात सामने आई है. मामले में PG संचालक हरिराम, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस अब निर्माण और भवन की सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है.
घायलों को 5 लाख रुपये की आर्थिक मदद
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचकर हादसे में घायल लोगों और उनके परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि घायलों के इलाज का खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी. साथ ही हादसे में घायल लोगों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है.
मुख्यमंत्री के अनुसार अस्पताल में भर्ती दो छात्रों की हालत स्थिर थी और उन्हें छुट्टी मिलने की उम्मीद थी. वहीं एक अन्य छात्र ICU में भर्ती था और उसकी स्थिति अधिक गंभीर बताई गई. एक घायल मजदूर का भी इलाज चल रहा था.
PG और कोचिंग सेंटरों की होगी जांच
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने PG और कोचिंग सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि छात्र आवास के तौर पर इस्तेमाल की जा रही इमारतें भवन नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन कर रही हैं या नहीं.
यह कार्रवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दिल्ली के कई इलाकों में छात्र बड़ी संख्या में निजी PG और किराये की इमारतों में रहते हैं. ऐसे में भवन की मजबूती, मंजूर निर्माण, अतिरिक्त मंजिल और सुरक्षा मानकों की अनदेखी छात्रों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है.
हादसे के बाद बढ़ी सुरक्षा की चिंता
सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में पुराने और कमजोर भवनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. एक इमारत के गिरने के बाद उसके आसपास मौजूद दूसरी संरचनाओं की जांच और कार्रवाई से यह साफ है कि प्रशासन अब संभावित खतरे वाली इमारतों को लेकर सतर्कता बढ़ा रहा है.
बगल की इमारत को 9 सितंबर को गिराने का फैसला इसी कार्रवाई का हिस्सा है. इसके साथ ही राजधानी के अन्य PG और छात्र आवासों की संरचनात्मक स्थिति की जांच का फैसला भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.


