इंदौर: मालवीय नगर चौराहा से गांधी नगर के बीच 17.5 किलोमीटर लंबे मेट्रो रूट पर रविवार से आम यात्रियों के लिए सेवा शुरू हो गई. पहले दिन मालवीय नगर स्टेशन से रवाना हुई पहली ट्रेन में भले ही सिर्फ 7 यात्री सवार हुए, लेकिन दोपहर बाद यात्रियों की संख्या बढ़ने लगी. शाम 4 बजे के बाद हर फेरे में करीब 40 से 50 यात्री सफर करते नजर आए.
पहले दिन इस रूट पर 6 हजार से ज्यादा यात्रियों ने मेट्रो की सवारी की. टिकट से करीब ढाई लाख रुपये की आय हुई. रविवार होने के कारण यात्री संख्या अपेक्षाकृत कम रही, लेकिन यात्रियों ने मेट्रो को ट्रैफिक जाम से बचने और आरामदायक सफर के लिहाज से बेहतर विकल्प बताया.
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16 स्टेशनों के बीच 52 मिनट का सफर
मालवीय नगर से गांधी नगर के बीच मेट्रो 16 स्टेशनों पर रुकी. एक तरफ का सफर करीब 52 मिनट में पूरा हुआ. प्रत्येक स्टेशन पर ट्रेन का ठहराव करीब 30 सेकंड रहा. यात्रियों को हर 15 मिनट में मेट्रो उपलब्ध हुई. मेट्रो की रफ्तार इस दौरान करीब 40 से 65 किलोमीटर प्रति घंटा रही. रविवार को सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक कमर्शियल रन किया गया.
स्टेशन से आगे जाने के लिए ऑटो-ई-रिक्शा का सहारा
यात्रियों ने मेट्रो सेवा को सुविधाजनक बताया, लेकिन नेटवर्क सीमित होने की समस्या भी सामने रखी. उनका कहना था कि स्टेशन से अंतिम गंतव्य तक पहुंचने के लिए अभी ऑटो, ई-रिक्शा या रैपिडो का सहारा लेना पड़ रहा है. यात्रियों ने मेट्रो नेटवर्क का विस्तार करने और किराया कम करने की मांग भी की.
पहली ट्रेन में सिर्फ 7 यात्री
मालवीय नगर स्टेशन से रविवार सुबह रवाना हुई पहली ट्रेन में केवल 7 यात्री सवार हुए. इनमें देवास नाका क्षेत्र के आनंद चौकसे और उनकी पत्नी भी शामिल थीं. उन्होंने बताया कि पिछले साल जब गांधी नगर से मेट्रो सेवा शुरू हुई थी, तब भी उन्होंने पहली ट्रेन में सफर किया था. हालांकि इस बार मोबाइल ऐप से टिकट बुक करते समय उन्हें परेशानी हुई. टिकट नहीं मिला, लेकिन खाते से पैसे कट गए. बाद में उनकी पत्नी के मोबाइल से टिकट बुक हो सका.
यात्रियों ने बताया ऑटो से बेहतर अनुभव
मंदसौर से आए राघवेंद्र सिंह ने भी भौंरासला स्टेशन से मेट्रो में सफर किया. उन्होंने कहा कि ऑटो की तुलना में मेट्रो का सफर ज्यादा बेहतर और आरामदायक लगा. निजी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर पुनीत दुबे भी सुबह करीब पौने नौ बजे स्टेशन पहुंच गए थे. उन्होंने बताया कि यह उनका नियमित रूट नहीं है, लेकिन वह मेट्रो का अनुभव लेने के लिए पहुंचे थे.
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मालवीय नगर निवासी धनराज चौहान ने बताया कि उनका काम अरबिंदो क्षेत्र में है. उनके मुताबिक, उज्जैन जाने की स्थिति में अब लवकुश चौराहा तक मेट्रो से पहुंचने का विकल्प मिल जाएगा. वहीं, स्कूली छात्र रिदम, हर्षिक और ओम गांधी नगर से एससी-3 तक मेट्रो से पहुंचे और फिर वापस गांधी नगर लौटे. उन्होंने कहा कि ऑटो के मुकाबले मेट्रो सस्ता और सुविधाजनक विकल्प है.


