Cervical Spondylosis: आजकल लंबे समय तक मोबाइल देखने, कंप्यूटर पर बैठकर काम करने और गलत पोश्चर के कारण गर्दन में दर्द और अकड़न की शिकायत काफी आम हो गई है. कई बार यह सामान्य मांसपेशियों के खिंचाव की वजह से होती है, लेकिन लगातार रहने वाला दर्द सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस जैसी समस्या का संकेत भी हो सकता है. यह गर्दन की रीढ़ की हड्डियों और डिस्क में उम्र के साथ होने वाले बदलावों से जुड़ी स्थिति है.
यह भी पढ़ें- Solar Panel Subsidy: ₹1 लाख सब्सिडी का सच क्या है? सोलर पैनल लगाने से पहले जान लें ये बात
क्या है सर्वाइकल बीमारी
आम बोलचाल में गर्दन की रीढ़ से जुड़ी कई समस्याओं को सर्वाइकल कहा जाता है. सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस में गर्दन की हड्डियों और उनके बीच मौजूद डिस्क में धीरे-धीरे घिसाव होने लगता है. उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या अधिक आम होती है. हर व्यक्ति में इसके लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है.
सर्वाइकल के प्रमुख लक्षण
सर्वाइकल की समस्या होने पर गर्दन में दर्द और अकड़न सबसे आम लक्षणों में शामिल हैं. गर्दन घुमाने में परेशानी हो सकती है और दर्द कंधों तक पहुंच सकता है. कुछ लोगों को गर्दन के पीछे से शुरू होने वाला सिरदर्द भी हो सकता है.
अगर गर्दन की नसों पर दबाव पड़ने लगे तो हाथ या उंगलियों में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो सकती है. गंभीर स्थिति में पैरों में कमजोरी, चलने में परेशानी या शरीर के तालमेल में कमी भी हो सकती है.
क्यों होती है यह समस्या
उम्र बढ़ना सर्वाइकल स्पॉन्डिलोसिस का प्रमुख कारण है. समय के साथ गर्दन की डिस्क में मौजूद पानी कम हो सकता है और डिस्क सिकुड़ने लगती है. इसके अलावा हड्डियों में अतिरिक्त उभार यानी बोन स्पर भी बन सकते हैं, जो कभी-कभी नसों पर दबाव डालते हैं.
गर्दन पर पुरानी चोट, लंबे समय तक गलत मुद्रा में काम करना और बार-बार गर्दन पर दबाव पड़ने वाली गतिविधियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं. धूम्रपान को भी गर्दन के दर्द से जोड़ा गया है.
बचाव के लिए क्या करें
गर्दन को लंबे समय तक एक ही स्थिति में रखने से बचना चाहिए. कंप्यूटर पर काम करते समय बैठने की मुद्रा सही रखें और बीच-बीच में ब्रेक लें. मोबाइल को लंबे समय तक नीचे की ओर झुककर देखने की आदत कम करना भी उपयोगी हो सकता है.
हल्की गर्दन की एक्सरसाइज और नियमित शारीरिक गतिविधि मददगार हो सकती है. फिजियोथेरेपिस्ट सही तरीके से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज बता सकता है.
सोते समय बहुत ऊंचे तकिए से बचें और ऐसी स्थिति में सोने की कोशिश करें जिसमें गर्दन पर अनावश्यक दबाव न पड़े. दर्द होने पर गर्म या ठंडी सिकाई से कुछ लोगों को राहत मिल सकती है.
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
अगर गर्दन के दर्द के साथ हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन होने लगे, चलने में परेशानी हो, शरीर का संतुलन बिगड़ने लगे या पेशाब-पाखाने पर नियंत्रण प्रभावित हो, तो इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है.
यह भी पढ़ें- पिंडदान के लिए गया जाने वालों को राहत, इन शहरों से चलेंगी स्पेशल ट्रेनें
लगातार कई हफ्तों तक गर्दन में दर्द या अकड़न रहने पर भी डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर शारीरिक जांच के अलावा एक्स-रे, MRI या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं.
नोट: गर्दन का हर दर्द सर्वाइकल नहीं होता. सही कारण जानने और दवा या एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना बेहतर है.


