नोएडा में बारिश के दौरान जलभराव से परेशान लोगों को राहत देने के लिए करीब 60 से 70 मीटर लंबे हिस्से में अचानक RCC सड़क बनाने का काम शुरू किया गया. मामला वर्क सर्कल-6 के तहत सेक्टर-73 स्थित सर्फाबाद और सेक्टर-121 व 122 की ओर जाने वाले मार्ग का है. ट्रैफिक पुलिस की शिकायतों के बाद प्राधिकरण की ओर से इस सड़क को तत्काल ठीक कराने का फैसला लिया गया.
बरसात के दौरान इस रास्ते पर पानी और कीचड़ भरने से स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हो रही थी. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भी इसी रास्ते से निकलना पड़ रहा था. हालांकि, अब सड़क निर्माण के तरीके को लेकर ही कई सवाल सामने आ रहे हैं.
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इमरजेंसी काम बताया, लेकिन बजट की जानकारी नहीं दी
मौके पर निर्माण कार्य करा रहे दीपक कंस्ट्रक्शन कंपनी के ठेकेदार दीपक के मुताबिक, इस रास्ते को लेकर ट्रैफिक पुलिस के टीआई की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं. उनका कहना था कि गांव के लोगों को आवागमन में परेशानी हो रही थी.
इसी के बाद प्राधिकरण के अधिकारियों ने सड़क को तत्काल ठीक कराने का फैसला लिया. ठेकेदार ने इसे इमरजेंसी काम बताया. हालांकि, सड़क निर्माण पर कुल कितना बजट खर्च हो रहा है और इसकी अनुमानित लागत क्या है, इस बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई.
वैकल्पिक रास्ता नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण शुरू करने से पहले राहगीरों के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता तैयार नहीं किया गया. ऐसे में निर्माण स्थल के आसपास जमा पानी और कीचड़ के बीच से लोगों को गुजरना पड़ा.
इस दौरान खासकर महिलाओं और बच्चों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा. सड़क निर्माण के दौरान लोगों की आवाजाही के लिए बेहतर व्यवस्था नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
कागजों और मौके की मोटाई में अंतर का सवाल
RCC सड़क की मोटाई इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल बनकर सामने आई है. ठेकेदार की ओर से सड़क की मोटाई करीब 8 से 10 इंच बताई जा रही थी.
लेकिन मौके पर पड़ताल के दौरान सड़क के किनारों पर कई जगह RCC की मोटाई करीब 3 से 4 इंच दिखाई दी. कुछ हिस्सों में यह मोटाई करीब 2 से 3 इंच तक नजर आई.
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पूरी सड़क पर तय मोटाई के मुताबिक RCC डाली गई है या कुछ हिस्सों में निर्माण की मोटाई कम है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर सड़क की वास्तविक तकनीकी गुणवत्ता या मानकों के अनुरूप निर्माण हुआ है या नहीं, इसका अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता.
ठेकेदार दीपक का कहना है कि RCC को सूखने में करीब 10 से 12 घंटे लगते हैं. उनका यह भी कहना है कि बारिश की वजह से सड़क खराब होती है तो उसे दोबारा बनाया जाएगा.
सड़क किनारे खुला सीवर सबसे बड़ी चिंता
निर्माण स्थल के आसपास सड़क किनारे खुला पड़ा सीवर भी चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है. मौके पर सीवर का हिस्सा खुला दिखाई देने के कारण यहां हादसे का खतरा बना हुआ है.
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि सड़क निर्माण के दौरान इस खुले हिस्से को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया. खुले सीवर के पास से गुजरते समय किसी पशु, महिला, पुरुष या बच्चे के गिरने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
ऐसे में सड़क निर्माण के साथ-साथ खुले सीवर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान देने की जरूरत नजर आती है.
अभी इन सवालों के जवाब बाकी
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल RCC सड़क की वास्तविक मोटाई, निर्माण की गुणवत्ता, काम की लागत और निर्माण स्थल पर लोगों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है. मौके पर ठेकेदार की ओर से इमरजेंसी काम की बात कही गई है, लेकिन उपलब्ध जानकारी में प्राधिकरण की ओर से निर्माण की तकनीकी गुणवत्ता और बजट को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है.


