नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भारतीय कोयला कंपनियों के लिए पहली क्षेत्रव्यापी कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR रूपरेखा लॉन्च की. इस मौके पर कोल इंडिया लिमिटेड यानी CIL की प्रमुख CSR पहलों के जरिए स्वास्थ्य क्षेत्र में हासिल उपलब्धियों को भी सामने रखा गया.
कार्यक्रम में बताया गया कि थैलेसीमिया बाल सेवा योजना यानी TBSY के तहत अब तक 1,050 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट पूरे किए जा चुके हैं. वहीं, जन्मजात हृदय दोष से पीड़ित बच्चों के लिए चलाई जा रही ‘नन्हा सा दिल’ पहल के तहत 1,500 से अधिक सुधारात्मक हृदय सर्जरी की गई हैं.
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नई दिल्ली में आयोजित हुआ कार्यक्रम
कोयला मंत्रालय ने CIL के साथ मिलकर नई दिल्ली में इस कार्यक्रम का आयोजन किया. इसमें केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ, कार्यान्वयन भागीदार और लाभार्थी परिवार शामिल हुए.
कार्यक्रम का फोकस कोयला क्षेत्र में CSR पहलों को ज्यादा संरचित और परिणामोन्मुख बनाने के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में CIL की प्रमुख पहलों की उपलब्धियों को सामने लाने पर रहा.
चार अस्पतालों से 21 अस्पतालों तक पहुंची TBSY
थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों से पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए शुरू की गई थैलेसीमिया बाल सेवा योजना का नेटवर्क अब शुरुआती चार अस्पतालों से बढ़कर 21 सूचीबद्ध अस्पतालों तक पहुंच गया है.
इसके जरिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है. कोयला क्षेत्र में CIL की यह पहल इन दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों से प्रभावित बच्चों के उपचार पर केंद्रित है.
बीएमटी के लिए प्रति मरीज 10 लाख रुपये तक की मदद
TBSY के तहत चार चरणों में कुल 130 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए प्रति मरीज 10 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है. यह राशि सीधे सूचीबद्ध अस्पतालों को उपलब्ध कराई जाती है.
अब तक 1,050 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट पूरे किए जा चुके हैं. कार्यक्रम में बताया गया कि उपचार प्राप्त करने वाले बच्चों में से बड़ी संख्या अब सामान्य और स्वस्थ जीवन जी रही है.
योजना का क्रियान्वयन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निगरानी मार्गदर्शन में थैलेसीमिक्स इंडिया के समन्वय से किया जा रहा है.
जन्मजात हृदय दोष के इलाज के लिए ‘नन्हा सा दिल’
बच्चों में जन्मजात हृदय दोष के इलाज के लिए CIL ने ‘नन्हा सा दिल’ पहल शुरू की. उपलब्ध जानकारी के मुताबिक भारत में हर साल करीब 2.4 लाख नवजात बच्चे जन्मजात हृदय दोष से प्रभावित होते हैं, जबकि इनमें से करीब 5 प्रतिशत को ही समय पर उपचार मिल पाता है.
इस पहल की शुरुआत मार्च 2024 में झारखंड के चार जिलों से श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ साझेदारी में हुई थी. बाद में इसका विस्तार CIL की सहायक कंपनियों SECL, CCL, NCL और WCL तक किया गया.
दो लाख से ज्यादा बच्चों की जांच
‘नन्हा सा दिल’ पहल के तहत आधुनिक नैदानिक उपकरणों की मदद से अब तक दो लाख से अधिक बच्चों की जांच की जा चुकी है. इनमें से 1,500 से अधिक सुधारात्मक हृदय सर्जरी की गई हैं.
मरीजों के परिवारों के लिए उपचार पूरी तरह निशुल्क बताया गया है. इसमें यात्रा और अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी शामिल है.
कोयला क्षेत्र के लिए पहली क्षेत्र-विशिष्ट CSR रूपरेखा
कार्यक्रम में कोयला क्षेत्र के लिए पहली क्षेत्र-विशिष्ट CSR रूपरेखा भी लॉन्च की गई. कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत वैधानिक CSR व्यवस्था लागू होने के बाद इसे कोयला क्षेत्र के लिए पहली क्षेत्र-विशिष्ट रूपरेखा बताया गया है.
इस रूपरेखा को भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान यानी IICA ने तैयार किया है. इसका उद्देश्य कोयला खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए अधिक प्रभावशाली और परिणामोन्मुख CSR पहलों के लिए एक मार्गदर्शक ढांचा उपलब्ध कराना है.
रूपरेखा में स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए CSR गतिविधियों को ज्यादा संरचित, पारदर्शी और प्रभावोन्मुख बनाने पर जोर दिया गया है.
स्वास्थ्य और शिक्षा में CIL के प्रयासों की सराहना
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने पिछले एक दशक में स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आजीविका और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में CIL की CSR प्रतिबद्धता को रेखांकित किया.
उन्होंने थैलेसीमिया बाल सेवा योजना, ‘नन्हा सा दिल’ और SECL की सुश्रुत जैसी पहलों की सराहना की. उन्होंने थैलेसीमिया और जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के हित में केंद्र और राज्य सरकारों, कार्यान्वयन एजेंसियों तथा अभिभावक संघों समेत समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी की जरूरत पर जोर दिया.
मंत्री ने लाभार्थी बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए उनकी शैक्षिक जरूरतों में सहयोग का भी आश्वासन दिया.
हर बच्चे को बेहतर इलाज का अवसर मिले
कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर उपचार, जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए.
उन्होंने थैलेसीमिया के उपचार और प्रभावित परिवारों की मदद के लिए CIL की CSR पहलों की सराहना की.
वहीं, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने जरूरतमंद बच्चों और उनके परिवारों तक जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में इन पहलों के प्रभाव को रेखांकित किया.
उन्होंने डॉक्टरों, सूचीबद्ध अस्पतालों और भागीदार संगठनों के योगदान की सराहना करते हुए गुणवत्ता-सुनिश्चित देखभाल, वास्तविक समय में मामलों की निगरानी, पारदर्शिता, जवाबदेही और विस्तार क्षमता को इन पहलों की प्रमुख विशेषताएं बताया.
स्थानीय जरूरतों पर आधारित CSR पर जोर
कोयला मंत्रालय की अपर सचिव रुपिंदर बरार ने कहा कि CSR की वास्तविक भावना लोगों के जीवन को छूने, समुदायों को सशक्त बनाने और जरूरतमंद लोगों के लिए अवसर पैदा करने में है.
उन्होंने कहा कि CSR interventions स्थानीय जरूरतों पर आधारित होने चाहिए और उनके पीछे सुविचारित योजना होनी चाहिए. साथ ही, इनके परिणामों का आकलन ठोस उपलब्धियों के आधार पर किया जाना चाहिए.
उनके मुताबिक नई CSR रूपरेखा कोयला क्षेत्र में सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े कामों को ज्यादा संरचित, पारदर्शी और प्रभावोन्मुख बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि CSR पहलों का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचे.
हर साल 10 हजार से ज्यादा बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं
मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के ट्रांसप्लांट यूनिट प्रमुख डॉ. शांतनु सेन ने कहा कि भारत में हर साल 10 हजार से ज्यादा बच्चे थैलेसीमिया के साथ जन्म लेते हैं.
उन्होंने बताया कि इन बच्चों का जीवन नियमित रक्त आधान पर निर्भर रहता है और इसके बावजूद कई बच्चे लंबे समय तक जीवित नहीं रह पाते.
डॉ. सेन के मुताबिक फिलहाल थैलेसीमिया के लिए बोन मैरो ट्रांसप्लांट एकमात्र उपलब्ध उपचार है. उन्होंने यह भी कहा कि अभिभावकों के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में बीएमटी का बहुत महंगा होना शामिल है.
लाभार्थी परिवारों ने जताया आभार
कार्यक्रम में उपचार प्राप्त करने वाले बच्चों और उनके परिवारों ने CIL, कोयला मंत्रालय, डॉक्टरों, अस्पतालों और भागीदार संगठनों के सहयोग के लिए आभार जताया.
लाभार्थी बच्चों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि समय पर उपचार ने उन्हें नई आशा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की ओर देखने का अवसर दिया है.
कार्यक्रम में इन पहलों के मानवीय असर को भी सामने रखा गया. वक्ताओं ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों या परियोजनाओं में नहीं, बल्कि उपचार के बाद बच्चों के जीवन में आए बदलाव और उनके भविष्य के प्रति बढ़े आत्मविश्वास में भी दिखाई देती है.
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पुस्तक का विमोचन और लघु फिल्मों का प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान थैलेसीमिया बाल सेवा योजना पर एक पुस्तक का विमोचन किया गया. स्वास्थ्य क्षेत्र में CIL की CSR पहलों पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी हुआ.
इसके अलावा डॉक्टरों और विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों का सम्मान तथा लाभार्थी परिवारों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया.


