Lifestyle Digital Desk: नया घर बनवाने के बाद हर किसी की कोशिश होती है कि दीवारों पर पसंदीदा रंग कराया जाए और घर की खूबसूरती बढ़ाई जाए. लेकिन सिर्फ अच्छा पेंट चुन लेना काफी नहीं है. नई दीवारों पर पेंट कराने से पहले उसकी सतह की तैयारी और नमी से सुरक्षा पर ध्यान देना भी जरूरी है. अगर दीवार के अंदर नमी मौजूद है और उसके ऊपर जल्दबाजी में पुट्टी या पेंट कर दिया जाए, तो आगे चलकर पेंट उखड़ने, पपड़ी बनने और सीलन के निशान जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं.
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नई प्लास्टर वाली दीवार को पहले अच्छी तरह सूखने दें
नई दीवार पर पेंट कराने से पहले सबसे जरूरी काम है उसे पर्याप्त समय देना. प्लास्टर के बाद दीवार के अंदर कुछ समय तक नमी बनी रह सकती है. ऐसे में जल्दबाजी में पुट्टी, प्राइमर या पेंट करने पर नमी सतह के अंदर फंस सकती है.
बाद में यही नमी पेंट की परत को प्रभावित कर सकती है और दीवार पर सीलन, पपड़ी या पेंट उखड़ने जैसी दिक्कत दिखाई दे सकती है. इसलिए पेंटिंग से पहले दीवार की स्थिति और नमी की जांच कराना बेहतर रहता है.
जहां जरूरत हो, वहां डैम्प-प्रूफ ट्रीटमेंट कराएं
अगर घर की किसी दीवार के दूसरी तरफ बाथरूम, किचन या पानी वाली जगह है, तो वहां नमी का जोखिम ज्यादा हो सकता है. इसके अलावा बाहरी दीवारों में बारिश का पानी, पाइप की लीकेज या दरारें भी सीलन का कारण बन सकती हैं.
ऐसी स्थिति में केवल ऊपर से पेंट करना पर्याप्त नहीं होता. पहले यह पता लगाना जरूरी है कि नमी का स्रोत क्या है. लीकेज या पानी के प्रवेश की समस्या को ठीक करने के बाद उपयुक्त वॉटरप्रूफिंग या डैम्प-प्रूफ ट्रीटमेंट कराया जा सकता है. विशेषज्ञ गाइडलाइन भी बताती हैं कि सीलन की स्थिति में पहले नमी के स्रोत को ठीक करना और फिर वॉटरप्रूफिंग करना चाहिए.
प्राइमर और सीलर की सही कोटिंग जरूरी
दीवार की सतह तैयार होने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण सही प्राइमर या सीलर का इस्तेमाल है. प्राइमर पेंट की पकड़ और फिनिश को बेहतर बनाने में मदद करता है. हालांकि हर तरह का प्राइमर लगातार सीपेज या गंभीर नमी वाली दीवार के लिए पर्याप्त नहीं होता.
इसलिए दीवार की स्थिति के अनुसार सामान्य प्राइमर, मॉइस्चर-रेजिस्टेंट प्राइमर या उपयुक्त वॉटरप्रूफिंग सिस्टम का चुनाव करना चाहिए. वॉटरप्रूफिंग के बाद उसे निर्माता के निर्देश के अनुसार सूखने और क्योर होने का समय देना भी जरूरी है. उसके बाद ही प्राइमर और पेंट की अगली परत लगानी चाहिए.
सिर्फ पेंट कराने से सीलन की समस्या खत्म नहीं होती
कई बार दीवार पर सीलन के निशान दिखाई देने पर लोग उसके ऊपर नया पेंट करा देते हैं. इससे कुछ समय के लिए दीवार साफ दिख सकती है, लेकिन अगर पानी आने का कारण मौजूद है तो समस्या दोबारा हो सकती है. वॉटरप्रूफिंग विशेषज्ञों के अनुसार छत की लीकेज, पाइप की समस्या, बाहरी दीवार में दरार या जमीन से आने वाली नमी जैसे कारणों को पहले पहचानना जरूरी है.
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इसलिए नई दीवारों पर पेंट कराने से पहले तीन बातों का ध्यान रखें – दीवार को पर्याप्त सूखने दें, जरूरत के अनुसार डैम्प-प्रूफ या वॉटरप्रूफिंग ट्रीटमेंट कराएं और उसके बाद सही प्राइमर/सीलर सिस्टम के साथ पेंट कराएं. इससे पेंट की फिनिश बेहतर रखने और नमी से जुड़ी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है.


