भारत ने वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस से निपटने और हेपेटाइटिस ‘बी’ तथा ‘सी’ को जन स्वास्थ्य के खतरे के रूप में खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने यूएनजीए 81 के साइड इवेंट ‘एडवांसिंग ग्लोबल एक्शन टू एलिमिनेट हेपेटाइटिस’ को संबोधित करते हुए भारत के प्रयासों और आगे की प्राथमिकताओं पर बात की.
यह कार्यक्रम हेपेटाइटिस को खत्म करने के लिए यूएन ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स की ओर से आयोजित किया गया था. कार्यक्रम में भारत ने 2030 के एसडीजी एजेंडा और 2030 तक हेपेटाइटिस बी और सी को जन स्वास्थ्य के खतरे के रूप में खत्म करने के वैश्विक लक्ष्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
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रोकथाम से इलाज तक भारत का फोकस
स्वास्थ्य सचिव ने हेपेटाइटिस से निपटने के लिए भारत की व्यापक और लोगों पर केंद्रित प्रतिक्रिया को रेखांकित किया. इसमें बीमारी की रोकथाम के साथ स्क्रीनिंग, निदान, उपचार और देखभाल को शामिल किया गया है.
भारत ने इस दिशा में अलग-अलग स्तरों पर अपने प्रयासों को मजबूत किया है. इनमें गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग, हेपेटाइटिस ‘बी’ टीकाकरण, मुफ्त जांच और इलाज, सुरक्षित रक्त आधान सेवाएं तथा इंजेक्शन के जरिए नशा लेने वाले लोगों के लिए परामर्श और पुनर्वास सहायता शामिल हैं.
इन उपायों का उद्देश्य बीमारी की पहचान और उपचार तक पहुंच को मजबूत करना है. साथ ही रोकथाम के स्तर पर भी काम किया जा रहा है.
22.5 करोड़ से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग
भारत में हेपेटाइटिस के खिलाफ चल रहे प्रयासों का पैमाना उपलब्ध आंकड़ों से भी सामने आता है. सोर्स के मुताबिक, देश में 22.5 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है.
इसके अलावा 6,52,000 से ज्यादा मरीजों को मुफ्त इलाज दिया गया है. ये आंकड़े भारत में हेपेटाइटिस की जांच और उपचार को लेकर किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हैं.
स्वास्थ्य सचिव ने 2030 के लक्ष्यों की दिशा में प्रगति को और तेज करने के लिए वैश्विक सहयोग की जरूरत पर भी जोर दिया.
समान स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पर जोर
पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि हेपेटाइटिस से निपटने के लिए रोकथाम, जांच और उपचार तक समान पहुंच जरूरी है. उन्होंने मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों के महत्व पर भी जोर दिया.
उनके अनुसार, 2030 के लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए लगातार वैश्विक सहयोग की जरूरत होगी. इसके साथ ही रोकथाम और समय पर जांच तथा उपचार की सुविधाओं तक लोगों की समान पहुंच सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है.
2030 के लक्ष्य को लेकर भारत की प्रतिबद्धता
भारत ने कहा है कि वह वायरल हेपेटाइटिस से निपटने और 2030 तक इसे जन स्वास्थ्य के खतरे के रूप में खत्म करने की दिशा में समन्वित, सुलभ और समान कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.
इसके लिए रोकथाम, स्क्रीनिंग, निदान, उपचार और देखभाल को एक साथ मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है. गर्भावस्था के दौरान स्क्रीनिंग से लेकर टीकाकरण, मुफ्त जांच और इलाज तथा सुरक्षित रक्त आधान जैसी सेवाओं को इस प्रयास का हिस्सा बताया गया है.
यूएनजीए 81 के साइड इवेंट में भारत ने अपने इन प्रयासों को सामने रखते हुए 2030 के वैश्विक लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों की आवश्यकता दोहराई.
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