सुबह की पहली किरण के संग,
मन में एक अरमान जगा,
करवा चौथ का पावन पर्व,
प्रेम का सुंदर पैगाम लाया.
हाथों में मेहंदी की खुशबू,
चूड़ियों की मीठी झंकार,
माथे पर बिंदिया सजाकर,
सजनी करे पिया का इंतजार.
लाल चुनरिया ओढ़ के बैठी,
आंखों में सपने हजार,
मन के मंदिर में बसते हैं,
मेरे सजना का ही प्यार.
सरगी की मीठी यादों से,
दिन की शुरुआत हुई,
पिया की लंबी उम्र की खातिर,
हर धड़कन एक प्रार्थना हुई.
न भूख सताए, न प्यास रुलाए,
मन में प्रेम का दीप जले,
सात जन्मों के साथ की खातिर,
दिल से निकली दुआ मिले.
आंगन में सखियां गीत सुनाएं,
हंसी से महके हर द्वार,
कथा सुनें और व्रत निभाएं,
मन में अटूट रहे विश्वास.
सूरज ढलते शाम सुहानी,
आसमान में रंग बिखेरती है,
चांद की राह निहारती आंखें,
पिया की यादों में ठहरती हैं.
कब निकलेगा चंदा प्यारा,
कब पूरी होगी आस,
कब छलनी से देखूंगी मैं,
अपने जीवन का मधुर प्रकाश.
चांद निकला तो खुशियां छाईं,
चेहरे पर मुस्कान खिली,
छलनी में चंदा, सामने साजन,
प्रेम की सुंदर तस्वीर मिली.
चांद को अर्घ्य देकर मैंने,
मांगी बस इतनी सौगात,
सुख-दुख में हम साथ रहें,
कभी न छूटे प्रेम का हाथ.
पिया के हाथों से जल पीकर,
पूरा हुआ व्रत का मान,
उनकी आंखों में प्यार देखकर,
मुस्काया मेरा सारा जहान.
न सोने-चांदी की चाहत है,
न महलों का कोई ख्वाब,
साजन का साथ बना रहे बस,
यही है दिल का जवाब.
करवा चौथ सिर्फ व्रत नहीं है,
ये रिश्तों का सम्मान है,
विश्वास, समर्पण और अपनापन,
इस प्रेम की असली पहचान है.
हर जन्म में साथ तुम्हारा,
हर पल तुमसे प्यार रहे,
चांद-सितारों की गवाही में,
हमारा रिश्ता आबाद रहे.
चांद रहे आकाश में रोशन,
दिल में प्रेम की ज्योत जले,
हर करवा चौथ यही दुआ है,
साजन संग जीवन खुशियों से भरे.


