Mount Abu New Road Project: राजस्थान के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू पहुंचना अब पहले से आसान हो सकता है. गुलाबगंज से माउंट आबू तक 22 किलोमीटर लंबी नई सड़क बनाने की परियोजना ने अहम पड़ाव पार कर लिया है. करीब 225 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के अलाइनमेंट को राज्यस्तरीय तकनीकी कमेटी ने मंजूरी दे दी है. सड़क बनने के बाद सिरोही से माउंट आबू की दूरी करीब 100 किलोमीटर से घटकर महज 55 किलोमीटर रह जाएगी. हालांकि, निर्माण शुरू होने से पहले वन विभाग की एनओसी और अन्य पर्यावरणीय मंजूरियां जरूरी होंगी.
225 करोड़ रुपये से बनेगी नई सड़क
गुलाबगंज से माउंट आबू तक प्रस्तावित सड़क की डीपीआर तैयार करने के लिए पहले भौगोलिक सर्वे कराया गया था. इसके बाद कंसल्टेंसी फर्म ने तीन संभावित अलाइनमेंट तैयार कर सार्वजनिक निर्माण विभाग को सौंपे.
राज्यस्तरीय तकनीकी कमेटी ने जांच के बाद पहले से मौजूद ग्रेवल सड़क वाले मार्ग को उपयुक्त मानते हुए मंजूरी दे दी है. अब जयपुर की कंसल्टेंसी फर्म को स्वीकृत अलाइनमेंट के आधार पर वन विभाग में आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं.
वन विभाग की एनओसी के बाद आगे बढ़ेगा काम
प्रस्तावित सड़क वन्य अभयारण्य क्षेत्र से होकर गुजरेगी. ऐसे में वन विभाग की अनुमति मिलना परियोजना के लिए सबसे महत्वपूर्ण चरण है. राज्य वन विभाग से एनओसी मिलने के बाद प्रस्ताव केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा जाएगा. इसके बाद राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), नई दिल्ली से संबंधित आवश्यक अनुमतियों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी. यानी अलाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बावजूद सड़क निर्माण शुरू होने में अभी कुछ समय लग सकता है.
माउंट आबू जाने वाले पर्यटकों को मिलेगी बड़ी राहत
फिलहाल माउंट आबू पहुंचने के लिए आबूरोड का प्रमुख सड़क मार्ग इस्तेमाल किया जाता है. इस रास्ते पर भारी यातायात रहता है. पहाड़ी चट्टानों और गहरी खाइयों के कारण मौजूदा सड़क का चौड़ीकरण भी आसान नहीं है.
बरसात के मौसम में चट्टानें गिरने और भूस्खलन के कारण कई बार रास्ता बंद होने की समस्या भी सामने आती है. ऐसे में गुलाबगंज से बनने वाला नया मार्ग माउंट आबू के लिए वैकल्पिक कनेक्टिविटी उपलब्ध करा सकता है. इससे पर्यटकों के साथ स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और माउंट आबू स्थित वायुसेना स्टेशन तक आने-जाने वाले लोगों को भी फायदा मिलने की उम्मीद है.
सांसद के प्रयास से मिली 225 करोड़ की राशि
जिला विकास परिषद के सचिव महावीर जैन के अनुसार, इस वैकल्पिक सड़क की मांग पिछले करीब 50 वर्षों से की जा रही है. क्षेत्रीय सांसद लुंबाराम चौधरी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ केंद्र सरकार के सामने इस मार्ग की आवश्यकता उठाई थी. इसके बाद केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने केंद्रीय सड़क निधि से परियोजना के लिए 225 करोड़ रुपये आवंटित किए. परियोजना की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति भी जारी हो चुकी है. वहीं, डीपीआर तैयार करने पर करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं.
नई सड़क दिल्ली-कांडला फोरलेन से सीधे जुड़कर माउंट आबू को राष्ट्रीय राजमार्ग-162 से बेहतर संपर्क उपलब्ध कराने में मदद करेगी.
पांच दशक पुरानी मांग पूरी होने की उम्मीद
करीब पांच दशक से प्रस्तावित इस सड़क परियोजना के आगे बढ़ने से स्थानीय लोगों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों में उम्मीद जगी है. नया मार्ग तैयार होने पर माउंट आबू तक पहुंचने के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा. इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी फायदा हो सकता है.
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फिलहाल सभी की निगाहें वन विभाग की एनओसी और अन्य जरूरी पर्यावरणीय मंजूरियों पर टिकी हैं. इनके मिलने के बाद ही 225 करोड़ रुपये की यह परियोजना निर्माण के अगले चरण में पहुंच सकेगी.
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