Patna-Purnia Expressway: बिहार के कोसी और सीमांचल क्षेत्र के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 20 नवंबर को बिहार के पहले नेशनल एक्सप्रेस-वे (NE-9) यानी पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे के निर्माण कार्य का शुभारंभ करेंगे. करीब 245 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे बिहार के कई प्रमुख जिलों को आपस में जोड़ेगा. इसके बनने से पटना से पूर्णिया का सफर मौजूदा 7 से 8 घंटे के बजाय महज 3 घंटे में पूरा हो सकेगा.
12,052 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा एक्सप्रेस-वे
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर करीब 12,052 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इस एक्सप्रेस-वे पर वाहनों की अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा प्रस्तावित है. यह मार्ग वैशाली जिले के मीरनगर (NH-22) से शुरू होकर समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया के चंद भट्टी (NH-27) तक पहुंचेगा. आगे इसे पटना रिंग रोड से जोड़ने की भी योजना है.
सहरसा के इन पांच प्रखंडों से होकर गुजरेगा रूट
इस एक्सप्रेस-वे से सहरसा जिले के पांच प्रमुख प्रखंडों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है. इसके तहत महिषी, सिमरी बख्तियारपुर, सोनवर्षा, सौरबाजार और पतरघट से होकर सड़क गुजरेगी. प्रस्तावित रूट दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान से राजनपुर होते हुए सहरसा में प्रवेश करेगा. इसके बाद मधेपुरा जिले के ग्वालपाड़ा से गुजरते हुए आगे बढ़ेगा. परियोजना से कोसी और सीमांचल के लोगों को राजधानी पटना तक पहुंचने के लिए तेज और बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा.
सहरसा से पटना का सफर सिर्फ 2 घंटे में
एक्सप्रेस-वे के निर्माण से सहरसा और आसपास के इलाकों से पटना पहुंचना काफी आसान हो जाएगा. निर्माण पूरा होने के बाद सहरसा से पटना की यात्रा करीब 2 घंटे में पूरी होने का अनुमान है. इसके अलावा एक्सप्रेस-वे बिहार के छह बड़े जिलों के 18 प्रमुख शहरों और कस्बों को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा. स्थानीय लोगों की सुविधा के लिए एक्सप्रेस-वे से सटे जिलों में विशेष संपर्क मार्ग (कनेक्टिंग रोड) भी बनाए जाएंगे, जिससे आसपास के क्षेत्रों के लोग आसानी से इस हाईवे तक पहुंच सकेंगे.
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किसानों और व्यापारियों को मिलेगा बड़ा फायदा
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे सिर्फ यात्रा का समय कम करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे बिहार की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है. खासकर कोसी और सीमांचल के किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी. मखाना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों को कम समय में दूसरे शहरों तक पहुंचाया जा सकेगा. इससे किसानों, व्यापारियों और निवेशकों को नए अवसर मिल सकते हैं. वहीं, एक्सप्रेस-वे के आसपास औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है.
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