Delhi-Panipat-Karnal Namo Bharat: दिल्ली से हरियाणा के पानीपत और करनाल तक नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर विकसित करने की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है. परियोजना के निर्माण में आने वाली बिजली लाइनों और उपकरणों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का रास्ता साफ हो गया है. इस संबंध में टाटा पावर-डीडीएल ने नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत बिजली नेटवर्क की शिफ्टिंग और दोबारा स्थापना की जाएगी. इस काम को शुरू होने के करीब एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
136 किलोमीटर से ज्यादा लंबा होगा नमो भारत कॉरिडोर
प्रस्तावित दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत कॉरिडोर की कुल लंबाई करीब 136.3 किलोमीटर होगी. इस रूट पर कुल 21 स्टेशन बनाए जाने प्रस्तावित हैं. इनमें छह स्टेशन दिल्ली और 15 स्टेशन हरियाणा में होंगे. परियोजना के तहत 124.82 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड ट्रैक और 11.48 किलोमीटर भूमिगत ट्रैक विकसित किया जाएगा. इससे दिल्ली और हरियाणा के प्रमुख शहरों के बीच तेज और आधुनिक क्षेत्रीय परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है.
38 हाई वोल्टेज बिजली लाइनों को किया जाएगा शिफ्ट
कॉरिडोर के निर्माण के रास्ते में 765, 400, 132 और 66 केवी की कुल 38 अतिरिक्त उच्च वोल्टेज (EHV) ट्रांसमिशन लाइनें आ रही हैं. इनके अलावा 33 केवी, 11 केवी और 415 वोल्ट की बिजली लाइनों को भी दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाएगा. ट्रांसफॉर्मर समेत अन्य बिजली उपकरणों की शिफ्टिंग और दोबारा स्थापना भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होगी.
MoU के तहत टाटा पावर-डीडीएल बिजली नेटवर्क की शिफ्टिंग के दौरान जरूरी निगरानी और EHV, हाई टेंशन (HT) तथा लो टेंशन (LT) नेटवर्क से संबंधित मंजूरियां उपलब्ध कराने में सहयोग करेगा. इस दौरान बिजली आपूर्ति की निरंतरता, सुरक्षा और निर्धारित वैधानिक मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा.
पीएमजी पोर्टल से होगी परियोजना की निगरानी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की निगरानी केंद्र सरकार के पीएमजी पोर्टल के माध्यम से की जा रही है. कॉरिडोर के रास्ते में आने वाले बिजली नेटवर्क का प्रबंधन BSES, टाटा पावर-डीडीएल, UHBVN, HVPNL, पावर ग्रिड और अन्य संबंधित एजेंसियां करती हैं. ऐसे में सभी एजेंसियों के समन्वय से बिजली लाइनों और उपकरणों को स्थानांतरित किया जाएगा.
180 KM प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें
दिल्ली-पानीपत-करनाल नमो भारत कॉरिडोर पर ट्रेनों की अधिकतम गति 180 किलोमीटर प्रति घंटा प्रस्तावित है. वहीं, इनकी औसत परिचालन गति करीब 160 किलोमीटर प्रति घंटा रखने की योजना है. यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेनों की फ्रीक्वेंसी पांच से दस मिनट के बीच प्रस्तावित है.
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कॉरिडोर शुरू होने से दिल्ली, सोनीपत, पानीपत और करनाल के बीच रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. नौकरी, कारोबार और शिक्षा के लिए इन शहरों के बीच आने-जाने वाले लोगों का यात्रा समय कम होगा. साथ ही सड़क मार्ग पर वाहनों का दबाव घटाने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत करने में भी मदद मिल सकती है.
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