दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच चल रहा विवाद अब नया मोड़ ले चुका है. शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन के बाद की गई. खास बात यह है कि इस प्रदर्शन की अगुवाई खुद ACP वशिष्ठ कर रहे थे और उनके साथ करीब 150 पुलिसकर्मी मौजूद थे.
पुलिसकर्मी ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार के तबादले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. वे दोनों अधिकारियों की तैनाती बहाल करने की मांग कर रहे थे. मामला बढ़ने पर दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने पुलिस मुख्यालय पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की थी. उन्होंने उनकी जायज शिकायतों पर उचित कदम उठाने का भरोसा दिया था. हालांकि, इसके बाद ACP वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया.
23 अक्टूबर को शाहदरा थाने में कैसे शुरू हुआ विवाद?
दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच ताजा विवाद 23 अक्टूबर 2026 को शुरू हुआ. उस दिन रोहताश नगर में एक सैलून के सामने बाइक पार्क करने को लेकर दुकानदार पक्ष और कुछ वकीलों के बीच विवाद हो गया था.
मामला बढ़ने के बाद दोनों पक्ष शाहदरा पुलिस थाने पहुंच गए. यहां वकील ललित बंसल के सिर में कथित तौर पर गंभीर चोट आई. इसके बाद थाने के अंदर ही वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच टकराव बढ़ गया.
इस घटना के बाद वकीलों ने विरोध शुरू कर दिया और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई. देखते ही देखते विवाद पुलिस और वकीलों के बीच बड़े टकराव में बदल गया.
ACP मनस्वी वशिष्ठ पर पिस्टल दिखाने का आरोप
शाहदरा थाने में हुई घटना के बाद वकीलों ने ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार पर दुर्व्यवहार करने और धमकाने का आरोप लगाया. वकीलों का दावा था कि ACP ने उनके सामने अपनी पिस्टल या रिवॉल्वर दिखाई और उन्हें डराने की कोशिश की.
वकीलों के मुताबिक, ललित बंसल के साथ मारपीट के बाद वे आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी लेने थाने पहुंचे थे. उनका आरोप था कि संबंधित आरोपी उस समय पुलिस हिरासत में नहीं थे. जब वकीलों ने इस बारे में सवाल किए, तो ACP मनस्वी वशिष्ठ ने कथित तौर पर अपनी रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकाया.
दूसरी तरफ, पुलिस पक्ष का कहना था कि वकीलों ने पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें धमकी दी. ACP वशिष्ठ ने भी पुलिसकर्मियों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और थानों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे को उठाया.
वकीलों की हड़ताल के बाद दोनों अधिकारियों का तबादला
विवाद बढ़ने के बाद वकील हड़ताल पर बैठ गए. उन्होंने ACP मनस्वी वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार के खिलाफ कार्रवाई तथा उनके तबादले की मांग की.
इसके बाद 28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ का ट्रांसफर Special Police Unit for Women and Children (SPUWAC) में कर दिया गया. वहीं, शाहदरा थाने के SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सिक्योरिटी ब्रांच में भेज दिया गया.
दोनों अधिकारियों के तबादले के बाद वकीलों की अनिश्चितकालीन हड़ताल खत्म हो गई. हालांकि, इस फैसले से दिल्ली पुलिस के कुछ कर्मचारी नाराज हो गए.
पुलिसकर्मियों ने पुलिस मुख्यालय के बाहर क्यों किया प्रदर्शन?
2 नवंबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ के नेतृत्व में करीब 150 पुलिसकर्मी दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जुटे. उनकी मांग थी कि ACP वशिष्ठ और SHO अरुण कुमार की पुरानी तैनाती बहाल की जाए.
प्रदर्शन के दौरान ACP वशिष्ठ ने पुलिसकर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को जिस तरह की गुंडागर्दी का सामना करना पड़ रहा है और थानों के अंदर सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं पैदा हो रही हैं, उनके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है.
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग भेष बदलकर गुंडागर्दी कर रहे हैं और अगर पुलिस थाने ही सुरक्षित नहीं हैं तो कोई भी जगह सुरक्षित नहीं हो सकती.
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार खुद पुलिस मुख्यालय पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों से बातचीत की. उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिसकर्मियों की जायज शिकायतों को दूर करने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे.
प्रदर्शन के बाद ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड
पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के बाद गृह मंत्रालय ने ACP मनस्वी वशिष्ठ को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया. इस कार्रवाई के बाद पुलिस और वकीलों के बीच पहले से चल रहे विवाद में एक नया घटनाक्रम जुड़ गया है.
पूरे मामले में अब तक पार्किंग विवाद, शाहदरा थाने में झड़प, वकीलों की हड़ताल, दो पुलिस अधिकारियों का तबादला और पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन जैसे कई घटनाक्रम सामने आ चुके हैं. वकीलों और पुलिस पक्ष के आरोप अलग-अलग हैं. ऐसे में मामले से जुड़े आरोपों और प्रशासनिक कार्रवाई को अलग-अलग समझना जरूरी है.
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