Delhi News: दिवाली के मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता सरकार ने झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है. दिल्ली सरकार ने ‘दिल्ली झुग्गी-झोपड़ी पुनर्स्थापन और पुनर्वास नीति, 2026’ अधिसूचित कर दी है. इस नीति के तहत राजधानी की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले करीब 20 लाख लोगों को पक्के मकान उपलब्ध कराने की योजना है. इसमें 1 जनवरी 2025 से पहले बसी झुग्गी-बस्तियों के पात्र परिवारों को 25 वर्ग मीटर तक के फ्लैट दिए जाएंगे.
दिल्ली गजट में 4 नवंबर को प्रकाशित इस नई नीति के जरिए करीब 675 झुग्गी-बस्तियों के पात्र निवासियों के पुनर्वास की व्यवस्था की गई है. यह नीति दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) अधिनियम, 2010 के तहत जारी पुराने पुनर्वास दिशानिर्देशों और आदेशों की जगह लेगी. इसका उद्देश्य झुग्गी निवासियों को वैकल्पिक आवास देने के साथ सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना और शहरी क्षेत्रों का पुनर्विकास करना भी है.
2 लाख रुपये देने पर मिलेगा 25 वर्ग मीटर का फ्लैट
नई पुनर्वास नीति के तहत पात्र परिवारों को वैकल्पिक आवास के लिए कुल 2 लाख रुपये का योगदान देना होगा. इसमें 1.5 लाख रुपये फ्लैट के लिए और 50 हजार रुपये शुरुआती पांच वर्षों के कॉमन एरिया मेंटेनेंस के लिए निर्धारित किए गए हैं. लाभार्थियों को कम से कम 25 वर्ग मीटर कारपेट एरिया वाला एक बेडरूम का फ्लैट मिलेगा. इसमें बेडरूम, लिविंग रूम, किचन, बाथरूम, टॉयलेट और बालकनी की सुविधा होगी. इसके अलावा बिजली, पानी, संपत्ति कर और अन्य लागू शुल्कों का भुगतान भी लाभार्थियों को करना होगा.
किसे मिलेगा पक्का मकान? जानिए पात्रता की शर्तें
इस योजना का लाभ लेने के लिए सबसे जरूरी शर्त यह है कि संबंधित झुग्गी का अस्तित्व 1 जनवरी 2025 से पहले का होना चाहिए. आवेदक को भारतीय नागरिक होना और उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए.इसके अलावा आवेदक का नाम 1 जनवरी 2025 से पहले जारी मतदाता सूची और संबंधित आधिकारिक सर्वेक्षण वर्ष की मतदाता सूची में दर्ज होना जरूरी है. निर्धारित निवास और अन्य पात्रता संबंधी शर्तों को पूरा करने वाले परिवारों पर ही पुनर्वास के लिए विचार किया जाएगा.
कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे?
पात्रता साबित करने के लिए आवेदक के पास निर्धारित 10 दस्तावेजों में से कम से कम एक होना चाहिए. यह दस्तावेज 1 जनवरी 2025 से पहले जारी हुआ हो और संबंधित झुग्गी के पते के लिए वैध होना चाहिए.
- फोटो वाला राशन कार्ड
- बिजली का बिल
- ड्राइविंग लाइसेंस
- पासपोर्ट
- बैंक या पोस्ट ऑफिस की पासबुक
- सरकार द्वारा जारी अन्य निर्धारित प्रमाण पत्र
इसके अलावा आवेदक और उसके परिवार के सदस्यों का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन भी किया जाएगा.
इन परिवारों को नहीं मिलेगा योजना का लाभ
नई नीति में कुछ श्रेणियों को पुनर्वास के लिए अपात्र रखा गया है. जिन परिवारों के पास भारत में कहीं भी अपना पक्का मकान है, वे इस योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे. इसके अलावा सरकारी सेवा में कार्यरत या सेवानिवृत्त कर्मचारी भी पात्रता से बाहर होंगे.
नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि झुग्गी में रहने मात्र से किसी व्यक्ति को मकान आवंटन का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता. हालांकि, सभी पात्रता शर्तें पूरी करने वाले निवासियों को वैकल्पिक आवास दिए बिना उनकी झुग्गी नहीं तोड़ी जाएगी.
एक परिवार को मिलेगा सिर्फ एक मकान
सरकार ने एक परिवार को एक ही फ्लैट आवंटित करने का प्रावधान किया है. एक से अधिक मकान आवंटित कराने की अनुमति नहीं होगी. हालांकि, यदि अलग-अलग परिवार एक ही इमारत की अलग-अलग मंजिलों पर रहते हैं, तो वे स्वतंत्र रूप से पात्र हो सकते हैं. इसके लिए उन्हें सभी निर्धारित शर्तें और दस्तावेज पूरे करने होंगे.
झुग्गी से 3 किलोमीटर दूर भी मिल सकता है मकान
पुनर्वास नीति में यह भी प्रावधान है कि लाभार्थियों को उनकी मौजूदा झुग्गी-बस्ती से दूर दूसरी जगह पर मकान दिया जा सकता है. सरकार की प्राथमिकता होगी कि लोगों को उनकी पुरानी जगह या अधिकतम तीन किलोमीटर के दायरे में ही बसाया जाए. हालांकि, सुरक्षा, बुनियादी ढांचे, शहरी नियोजन, कानूनी या अन्य कारणों से ऐसा संभव नहीं होने पर पात्र परिवारों को दिल्ली में किसी दूसरी जगह भी बसाया जा सकता है. इस फैसले का असर उन परिवारों पर पड़ सकता है, जिनकी रोजी-रोटी आसपास के बाजारों, कामकाज की जगहों और स्कूलों पर निर्भर है.
10 साल तक न बेच सकेंगे, न किराये पर दे सकेंगे फ्लैट
सरकार ने आवंटित मकानों के लिए 10 साल का लॉक-इन पीरियड निर्धारित किया है. इस अवधि के दौरान लाभार्थी फ्लैट को बेच या किसी अन्य व्यक्ति के नाम ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे. शुरुआत में मकान लीजहोल्ड आधार पर आवंटित किए जाएंगे. 10 साल पूरे होने के बाद सभी बकाया भुगतान और निर्धारित शर्तें पूरी करने पर बिना कन्वर्जन चार्ज के मालिकाना हक हस्तांतरित किया जा सकेगा. लाभार्थी इन मकानों को किराये पर भी नहीं दे सकेंगे. जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) या किसी अन्य अनधिकृत तरीके से मकान का कब्जा दूसरे व्यक्ति को सौंपने पर भी रोक रहेगी. नियमों का उल्लंघन करने पर नोटिस और अपना पक्ष रखने का अवसर देने के बाद आवंटन रद्द किया जा सकता है.
दोबारा सरकारी जमीन पर कब्जा किया तो छिन जाएगा मकान
नई नीति के तहत यदि किसी लाभार्थी को पुनर्वास के लिए फ्लैट मिलने के बाद वह दोबारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करता है, तो उसका आवंटन रद्द करने के साथ फ्लैट जब्त भी किया जा सकता है. वहीं, जिन लोगों को अपात्र घोषित किया जाएगा, उन्हें फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार मिलेगा. इसके लिए निर्णय मिलने के 30 दिनों के भीतर अपील करनी होगी. उचित कारण होने पर अपीलीय प्राधिकरण 180 दिनों तक की अतिरिक्त अवधि के भीतर दाखिल देरी वाली अपील पर भी विचार कर सकता है.
इस नई नीति के लागू होने से दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में रहने वाले लाखों लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया को नया आधार मिलेगा. हालांकि, वास्तविक लाभ उन्हीं परिवारों को मिलेगा जो सरकार की निर्धारित पात्रता और सत्यापन की सभी शर्तें पूरी करेंगे.
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