भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति अब केवल चिप निर्माण तक सीमित नहीं रह गई है. देश में इस उद्योग से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. इसमें चिप बनाने वाली कंपनियों के साथ डिजाइन, कच्चे माल, रसायन, गैस, मशीनों, रिसर्च और कुशल कर्मचारियों की व्यवस्था भी शामिल होगी. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के CEO अमितेश कुमार सिन्हा ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी.
ISIG एग्जीक्यूटिव समिट इंडिया 2026 के अंतिम दिन उन्होंने बताया कि भारत में अब तक सेमीकंडक्टर विनिर्माण से जुड़ी 12 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है. इनमें से पांच परियोजनाओं में व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू हो गया है. यह देश के सेमीकंडक्टर उद्योग के विकास की दिशा में एक अहम प्रगति है.
Semicon 2.0 का फोकस पूरे उद्योग का नेटवर्क तैयार करना
अमितेश कुमार सिन्हा ने कहा कि सेमीकॉन 2.0 का उद्देश्य सिर्फ सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाना नहीं है. इसके तहत चिप उद्योग से जुड़ी दूसरी जरूरी गतिविधियों को भी देश में विकसित करने की योजना है.
इसमें डिजाइन कंपनियां, कच्चे माल की उपलब्धता, विशेष रसायन, गैस, विनिर्माण उपकरण, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और कुशल प्रतिभाओं का विकास शामिल है. इसका मकसद ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें चिप निर्माण के अलग-अलग चरणों के लिए भारत को पूरी तरह बाहरी सप्लाई पर निर्भर न रहना पड़े.
सिन्हा के अनुसार, भारत के पास बड़ा घरेलू बाजार, प्रतिभाशाली कार्यबल और सरकारी प्रोत्साहन जैसी मजबूत क्षमताएं हैं. हालांकि, इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए वैश्विक तकनीकी साझेदारी और मजबूत सप्लाई चेन भी जरूरी होगी.
भारत में पहली बार आयोजित हुआ ISIG एग्जीक्यूटिव समिट
‘Enabling the Intelligent Future: Advanced Semiconductors, AI, Data Centers and Power Electronics’ विषय पर आयोजित ISIG एग्जीक्यूटिव समिट भारत में पहली बार हुआ. सम्मेलन के अंतिम दिन सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई.
इसमें वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी, निवेशक, शोधकर्ता और सरकारी प्रतिनिधि शामिल हुए. चर्चा का मुख्य उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग की संभावनाओं को समझना और इसके विकास के लिए जरूरी तकनीक, निवेश तथा साझेदारियों पर विचार करना था.
एडवांस्ड पैकेजिंग, AI और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स पर चर्चा
समिट में सेमीकंडक्टर उद्योग के कई उभरते क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया. इनमें एडवांस्ड पैकेजिंग, आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट (OSAT), पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) और गैलियम नाइट्राइड (GaN) शामिल रहे.
इसके अलावा AI और डेटा सेंटर की बढ़ती मांग को देखते हुए जरूरी सेमीकंडक्टर तकनीक पर भी विचार-विमर्श हुआ. इन क्षेत्रों में घरेलू स्तर पर डिजाइन क्षमता, सामग्री, उपकरण और सप्लाई चेन विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया गया.
AI और डेटा सेंटर के विस्तार के साथ एडवांस्ड चिप्स और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की मांग बढ़ने की संभावनाएं हैं. ऐसे में भारत के लिए इस उद्योग में अपनी क्षमता मजबूत करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बिहार सरकार के साथ ISIG का रणनीतिक समझौता
समिट के दौरान ISIG ने बिहार सरकार के साथ रणनीतिक सहयोग समझौता भी किया. इसका उद्देश्य राज्य में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम विकसित करने के लिए मिलकर काम करना है.
यह समझौता बिहार में इस क्षेत्र से जुड़ी संभावनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक कदम है. हालांकि, दिए गए विवरण में प्रस्तावित परियोजनाओं, निवेश राशि या उनके लिए तय समयसीमा की जानकारी नहीं दी गई है.
ISIG की भारत महाप्रबंधक और पावर सेमीकंडक्टर प्रमुख डॉ. शालू अग्रवाल ने कहा कि भारत में एडवांस्ड पैकेजिंग और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में काफी संभावनाएं हैं. उनके मुताबिक, वैश्विक उद्योग, निवेश और तकनीकी साझेदारियों को एक मंच पर लाकर इन संभावनाओं को आगे बढ़ाया जा सकता है.
2027 में होगा समिट का अगला संस्करण
ISIG एग्जीक्यूटिव समिट का अगला संस्करण 30 नवंबर से 1 दिसंबर 2027 के बीच भारत में आयोजित किया जाएगा. इसके जरिए सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े वैश्विक प्रतिनिधियों, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को एक बार फिर साथ आने का अवसर मिलेगा.
कुल मिलाकर, भारत की सेमीकंडक्टर रणनीति अब चिप निर्माण से आगे बढ़कर पूरे उद्योग का नेटवर्क तैयार करने पर केंद्रित होती दिखाई दे रही है. 12 परियोजनाओं को मंजूरी और पांच में व्यावसायिक उत्पादन की शुरुआत इस दिशा में हुई प्रगति को दिखाती है. आने वाले समय में घरेलू डिजाइन, सामग्री, उपकरण और तकनीकी साझेदारियों का विकास इस इकोसिस्टम को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
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