कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में शोध एवं नवाचार को बौद्धिक संपदा अधिकारों के माध्यम से संरक्षित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है. भारत कई क्षेत्रों में प्रगति किया है फिर भी बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में काफी पीछे है आने वाले दिनों में वही दुनिया में राज करेगा जिसके पास बौद्धिक संपदा अधिकार होंगे.
उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल मौलिक अनुसंधान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस शोध को सामाजिक व आर्थिक उपयोग के योग्य बनाते हुए पेटेंट कराना आवश्यक है. कृषि के क्षेत्र में भारत वैश्विक पटल पर आईपीआर के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा सकता है इसके लिए भारत के युवाओं को आईपीआर पर काफी काम करना होगा. इसके लिए युवा अपनी तार्किक शक्ति और बढ़ाएं.
कुलपति ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों, परास्नातक विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों का आह्वान किया कि वे अपने मौलिक शोध कार्यों और तकनीकी नवाचारों को पेटेंट एवं अन्य बौद्धिक संपदा अधिकारों में परिवर्तित करने की दिशा में सक्रिय प्रयास करें, जिससे विश्वविद्यालय की अकादमिक एवं शोध संस्कृति को एक नई दिशा मिल सके.
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता ने क्या कहा?
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ के सलाहकार एवं बीएचयू के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) हरिकेश बहादुर सिंह रहे. उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पेटेंट की आवश्यकता, आवेदन की प्रक्रिया, पेटेंट योग्य नवाचारों की पहचान तथा उनके औद्योगिक एवं सामाजिक व्यावसायीकरण पर विस्तार से जानकारी प्रदान की. कार्यक्रम में विज्ञान संकाय के अधिष्ठाता प्रो. एस. एस. मिश्रा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए बौद्धिक संपदा को अकादमिक विकास का मुख्य आधार बताया.
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कौन-कौन मौजूद रहा?
विभाग अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने बताया कि भारतीय पेटेंट कार्यालय के आंकड़ों से स्पष्ट है कि हमारे देश के विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स द्वारा पेटेंट फाइल करने की दर में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है. ‘मेक इन इंडिया’ और ‘स्टार्टअप इंडिया’ जैसी पहलों ने इस गति को और बढ़ाया है. इस अवसर पर सिविल इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अमित कुमार, डॉ सौहार्द ओझा, कन्हैया लाल पाण्डेय, डॉ प्रिंस पोद्दार, डॉ नवीन पटेल सहित विभिन्न विभागों के शिक्षकगण, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे.


