Ayodhya News: डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के श्रीराम शोध पीठ संस्थान में पांच दिवसीय कार्यशाला इनफ्रास्ट्रकचर मैनेजमेंट इन पब्लिक लाइब्रेरीज का उद्घाटन मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेन्द्र सिंह ने किया. कार्यशाला की विशिष्ट अतिथि कला एवं मानविकी संकयाध्यक्ष प्रो. मृदुला मिश्रा रही. अपने उद्बोधन में कुलपति डॉ. बिजेन्द्र सिंह ने कहा कि पुस्तकालय किसी भी संस्था की सूचना केन्द्र होता है. हम सभी जानते हैं कि विश्वविद्यालय में शिक्षण व शोध का कार्य किया जाता है, शोध कार्यों को सम्पन्न करने में पुस्तकालय का महत्व और भी बढ़ जाता है. सार्वजनिक पुस्तकालय किसी भी जीवन्त समाज की चेतना, सांस्कृतिक मूल्यों की संरक्षक होते हैं. ये समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए भी ज्ञान का द्वार खोलते हैं.
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वर्तमान समय में सूचना प्रवाह की गति डिजीटलीकरण के कारण अत्यन्त तीव्र हो गयी है. विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थानों में पुस्तकालयों में पाठकों को अच्छी सुविधा प्रदान करने हेतु अनेक प्रकार के आधुनिक सॉफ्टवेयर यथा कोहा, सॉफ्टग्रन्थ, शोल, ई-ग्रन्थालय इत्यादि सॉफ्टवेयर का उपयोग तेजी से किया जा रहा है, इन्हीं माध्यमों से ई-रिर्सोसेज यथा ई-बुक्स, ई-जर्नल्स, ई-पेपर इत्यादि को कम समय में अधिक से अधिक पाठकों को उपलब्ध कराया जा रहा है.
हमारे विश्वविद्यालय के केन्द्रीय पुस्तकालय में भी जैसे कि सॉफ्टग्रन्थ, किबो, ड्रिलबीट आदि सॉफ्टवेयर का उपयोग कर 23500 ई-बुक्स, 13500 राष्ट्रीय एवं अर्न्तराष्ट्रीय जर्नल्स के शोध पत्रों को उपलब्ध कराया जा रहा है. इसके अतिरिक्त पुस्तकालय में विभिन्न पाठ्यक्रमों से सम्बन्धित 2 लाख से अधिक टेक्स बुक्स भी उपलब्ध है. विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में मिनी लाइब्रेरी की होगी स्थापना. जिससे परिसर संचालित पाठ्यक्रम के छात्र शैक्षिक ज्ञान संवर्धन में सहायक हो सके.
कुलपति ने बताया कि लाइब्रेरी में जहां समाज का हर वर्ग बिना किसी भेद-भाव के सूचना प्राप्त कर सकता है. आवष्यकता है हमारे विश्वविद्यालय में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं का प्रचार-प्रसार पब्लिक लाइब्रेरी तक पहुंचे ताकि समाज के अंतिम पायदान पर उपस्थित व्यक्ति भी इसका लाभ ले सकें. पुस्तकालय अनुषासन का केन्द्र होता है, यह ज्ञान का मंदिर एवं पवित्र स्थल है जहां ज्ञान की अधिष्ठात्री माता सरस्वती विराजमान होती है.
मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस पांच दिवसीय कार्यषाला में हम अच्छे निष्कर्ष पर पहुंचेंगे और पब्लिक लाइब्रेरी को कैसे बेहतर बनाया जा सके तथा इनसे समाज के हर एक व्यक्ति को अल्प समय में सूचना उपलब्ध हो इस बात को सुनिष्चित करने में सफल होंगे. इन्हीं षब्दों के साथ आप सभी को इस पांच दिवसीय कार्यशाला के सफल अयोजन हेतु शुभकामनाएं.
विशिष्ट अतिथि प्रो. मृदुला मिश्रा ने बताया कि पुस्तकालय शोधार्थियों, शिक्षकों, छात्रों के मार्गदर्षक होते हैं, जहां उन्हें सन्दर्भ पुस्तकों के साथ-साथ पर्याप्त मार्गदर्शन भी प्राप्त होता है. कार्यशाला के संयोजक प्रो. सिद्धार्थ शुक्ला ने बताया कि आज के 21वीं सदी में डिजिटल ज्ञान आधारित युग में पुस्तकालयों की परिभाषा बदल चुकी है. अब पुस्तकालय कम्यूनिटी नालेज हब बन चुके है. जहां पर ई-बुक्स, हाई स्पीड इंटरनेट और क्लाउड बेस्ड लाइब्रेरी मैनेजमेंट सिस्टम आज की बुनियादी जरूरतें बन चुकी है. प्रो. शुक्ल ने बताया कि आधुनिक उपकरणों और आरएफआईडी जैसी तकनीकों के पुस्तकालयों का प्रबन्ध तन्त्र चल रहा है.
कार्यशाला में पीएम उषा के समन्यवक डॉ. पीके. द्विवेदी ने बताया कि विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत देश की 26 संस्थाओं में से चयनित किया गया था, और विश्वविद्यालय को मेरू विश्वविद्यालय के तहत अनुदानित किया गया था. इसी योजना के तहत वर्कशॉप, रिसर्च एण्ड डवलपमेंट, स्किल डवलपमेंट सहित लाइब्रेरी को उच्चीकृत किया जायेगा.
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कार्यशाला का शुभारम्भ मां सरस्वती के प्रतिमा पर दीप प्रज्वलन व पुष्प अर्पित कर किया गया. कार्यशाला के प्रथम दिन कुल 55 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया. कार्यशाला में विश्वविद्यालय के प्रो. एसएस मिश्र, प्रो सीके मिश्रा, प्रो. हिमांशु शेखर सिंह, प्रो. फर्रूख जमाल, प्रो. गंगाराम मिश्र, प्रो. विनोद श्रीवास्तव, प्रो. शैलेन्द्र कुमार वर्मा, डॉ.विनोद चौधरी, डॉ. अनिल सिंह, डॉ.अवनिश सिंह, योगेष अग्रवाल, कौशल किशोर मिश्र, रामनिवास गौड़, आशीष जायसवाल, अमित कुमार, पूजा सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी व छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.


