BrahMos Missile Success: मई 2025 में भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक साल पूरा होने के बाद अब इसके दूरगामी प्रभाव साफ दिखाई देने लगे हैं. उस समय पाकिस्तान और चीन ने चीनी J-10CE फाइटर जेट्स को भारत के खिलाफ बड़ी ताकत के रूप में पेश करने की कोशिश की थी, लेकिन आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. जहां चीनी लड़ाकू विमानों की चर्चा वैश्विक रक्षा बाजार में कमजोर पड़ गई है, वहीं भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दुनिया के कई देशों की पहली पसंद बनती जा रही है.
आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों और कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए थे. इस अभियान में ब्रह्मोस मिसाइल, स्कैल्प क्रूज मिसाइल और राफेल लड़ाकू विमानों के शानदार समन्वय ने भारतीय सैन्य क्षमता का प्रदर्शन किया. भारतीय कार्रवाई के सामने पाकिस्तान की वायु और रक्षा व्यवस्था प्रभावी जवाब देने में असफल रही.
चीनी रक्षा उपकरणों की विश्वसनीयता पर सवाल
हाल ही में चीन के सरकारी मीडिया CCTV पर प्रसारित एक कार्यक्रम में चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन इंस्टीट्यूट के इंजीनियरों ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वे पाकिस्तान के एयरबेस पर मौजूद थे और J-10CE लड़ाकू विमानों को तकनीकी सहायता प्रदान कर रहे थे. इसके बावजूद पाकिस्तान को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जिससे चीनी रक्षा उपकरणों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे.
दूसरी ओर, भारत की ब्रह्मोस मिसाइल लगातार अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान मजबूत कर रही है. फिलीपींस के बाद अब वियतनाम ने भी ब्रह्मोस खरीदने का फैसला किया है. इसके अलावा इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड जैसे देश भी इस मिसाइल में रुचि दिखा रहे हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में ब्रह्मोस की तैनाती चीन की समुद्री रणनीति के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.
ब्रह्मोस की करीब तीन मैक की गति, सटीक निशानेबाजी और कम प्रतिक्रिया समय इसे दुनिया की सबसे प्रभावी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में शामिल करते हैं. यही वजह है कि एशिया के अलावा संयुक्त अरब अमीरात, चिली और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के साथ भी इसके निर्यात को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है.
सोना-चांदी में बड़ी गिरावट, अमेरिकी रोजगार आंकड़ों ने बढ़ाया दबाव, निवेशकों में बढ़ी बेचैनी
ब्रह्मोस मिसाइल लगातार अंतरराष्ट्रीय बाजार मांग
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत केवल हथियार बेचने वाला देश नहीं बन रहा, बल्कि एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार के रूप में उभर रहा है. भारत हथियारों के साथ प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी उपलब्ध कराता है, जिससे मित्र देशों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. एक साल पहले जिस ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चीन और पाकिस्तान बड़े दावे कर रहे थे, आज उसी अभियान के बाद वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की मांग तेजी से बढ़ रही है. वहीं चीनी फाइटर जेट्स को लेकर उठे सवाल दोनों देशों के दुष्प्रचार पर भारी पड़ते दिखाई दे रहे हैं.


