Gorakhpur Siliguri Expressway: पूर्वांचल से बिहार और पश्चिम बंगाल तक सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाले गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. करीब 37,500 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले लगभग 550 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने मंजूरी दी है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से शुरू होकर कुशीनगर, बिहार के कई जिलों से होते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक पहुंचेगा. इसके बनने से गोरखपुर से सिलीगुड़ी का सफर, जो फिलहाल करीब 15 घंटे तक ले सकता है, घटकर लगभग 6 से 8 घंटे रह जाने की उम्मीद है.
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तमकुहीराज के 40 से ज्यादा गांवों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे
कुशीनगर के तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में भी इस एक्सप्रेसवे का बड़ा हिस्सा प्रस्तावित है. जानकारी के मुताबिक, एक्सप्रेसवे पकड़ियार पश्चिम पट्टी, सुमही रानी, परसा उर्फ सिरिसिया, जगदीशपुर, सुमही बुजुर्ग उर्फ मेहदिया, सुमही मोहन सिंह, जवही दयाल समेत 40 से अधिक गांवों से होकर गुजरेगा. इसके बाद एक्सप्रेसवे गंडक नदी के रास्ते बिहार में प्रवेश करेगा. परियोजना के यहां से गुजरने की वजह से इलाके में सड़क संपर्क, व्यापार और स्थानीय विकास की नई संभावनाएं बनने की उम्मीद है.
विरोध के बाद बदला गया एलायमेंट
पहले प्रस्तावित एलायमेंट के अनुसार एक्सप्रेसवे से सेवरही नगर पंचायत के चार वार्ड प्रभावित हो रहे थे. बताया गया कि 72 से अधिक लोगों के मकान इसकी जद में आ रहे थे. इसके चलते स्थानीय स्तर पर इसका भारी विरोध हुआ. विरोध के बाद परियोजना के एलायमेंट में बदलाव किया गया. नए एलायमेंट के बाद नगर पंचायत के चारों वार्ड अब एक्सप्रेसवे की जद से बाहर हो गए हैं. इससे प्रभावित होने वाले लोगों को बड़ी राहत मिली है.
120 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे को शुरुआती तौर पर चार लेन का बनाया जा रहा है. भविष्य में यातायात की जरूरत के अनुसार इसे छह लेन तक विस्तारित किया जा सकता है. इसकी डिजाइन स्पीड करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटा रखे जाने की बात कही जा रही है. यह एक्सप्रेसवे नेपाल सीमा के समानांतर क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जिससे उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के बीच संपर्क मजबूत होने के साथ-साथ पूर्वोत्तर राज्यों तक आवाजाही आसान होने की उम्मीद है.
बिहार के कई जिलों को जोड़ेगा
एक्सप्रेसवे बिहार के पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज समेत कई जिलों से होकर गुजरने की योजना है. इससे बिहार के सीमावर्ती और पिछड़े इलाकों में भी कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है.
रोजगार और कारोबार को मिलेगा बढ़ावा
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे सिर्फ सफर आसान करने वाली सड़क नहीं होगी, बल्कि पूर्वांचल, बिहार और उत्तर बंगाल के लिए आर्थिक गतिविधियों का नया कॉरिडोर भी बन सकती है. एक्सप्रेसवे के आसपास नए बाजार, परिवहन केंद्र, छोटे-बड़े उद्योग और रोजगार के अवसर विकसित होने की संभावना है. किसानों के लिए भी कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक कम समय में पहुंचाना आसान होगा.
2028 तक पूरा करने का लक्ष्य
करीब 520 से 568 किलोमीटर के बीच बताए जा रहे इस प्रोजेक्ट के अलग-अलग हिस्सों में भूमि अधिग्रहण और टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. परियोजना को 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच यह एक्सप्रेसवे तैयार होने के बाद पूर्वांचल से उत्तर बंगाल तक कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने की उम्मीद है. तमकुहीराज क्षेत्र के लिए भी यह परियोजना सड़क, व्यापार और रोजगार के लिहाज से बड़े बदलाव का रास्ता खोल सकती है.


