Dehradun News: देहरादून की राजधानी के कांवली गांव में धर्मांतरण की संदिग्ध कोशिशों को लेकर माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया है. दो महिलाओं पर घर-घर जाकर लोगों को चुपके से धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने के आरोप ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है. घटना के बाद से सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव को लेकर नई बहस छिड़ गई है.
जानकारी के मुताबिक, मामला तब सामने आया जब गांव की गलियों में दो संदिग्ध महिलाओं को घूमते हुए देखा गया. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि दोनों महिलाएं पारंपरिक हिंदू वेशभूषा में थीं, जिससे शुरुआत में किसी को शक नहीं हुआ. आरोप है कि वे खासकर महिलाओं से संपर्क कर हिंदू देवी-देवताओं और परंपराओं के प्रति भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही थीं और ईसाई धर्म की बातों को प्रमुखता दे रही थीं.
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संदेह बढ़ने पर हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने महिलाओं को रोककर पूछताछ की. बताया जा रहा है कि महिलाएं अपने आने का स्पष्ट कारण नहीं बता सकीं, जिसके बाद मौके पर हंगामा हो गया और बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए.
इस घटना के बाद ‘गुप्त धर्म प्रचार’ या तथाकथित ‘क्रिप्टो-क्रिश्चियनिटी’ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. कुछ संगठनों का दावा है कि यह एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो पहचान छिपाकर लोगों के बीच काम करता है.
स्थानीय संगठनों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है. उनका कहना है कि भेष बदलकर धार्मिक प्रचार करना न सिर्फ अनैतिक है, बल्कि कानून का उल्लंघन भी हो सकता है. वहीं, क्षेत्र के निवासियों ने भी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है. लोगों ने मांग की है कि बाहरी व्यक्तियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य किया जाए और धर्मांतरण विरोधी कानूनों का सख्ती से पालन कराया जाए.
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. प्रशासन का कहना है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर न पहुंचें. कांवली गांव की यह घटना एक बार फिर संवेदनशील मुद्दों पर सतर्कता और संतुलित कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित करती है.


