Dharmendra Pradhan resignation: NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और धांधली के आरोपों को लेकर देशभर में छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पत्र जारी कर कहा कि वह छात्रों के भविष्य को किसी विवाद या कानूनी उलझन में नहीं फंसने देना चाहते और नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ रहे हैं.
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धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पत्र में लिखा कि कुछ असामाजिक तत्व छात्रों के आंदोलन का गलत फायदा उठा सकते हैं. ऐसे में शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के हितों को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया.
मोदी सरकार में पहली बार ऐसा इस्तीफा
2014 से केंद्र में सत्ता संभालने के बाद यह पहला मौका माना जा रहा है जब किसी केंद्रीय मंत्री ने लंबे जन-आंदोलन और छात्र विरोध के बीच अपने पद से इस्तीफा दिया है. इससे पहले #MeToo अभियान के दौरान तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर ने आरोपों के बाद इस्तीफा दिया था, लेकिन उस मामले में इस स्तर का सड़क पर आंदोलन नहीं हुआ था.
सड़क से संसद तक गूंजा मुद्दा
NEET-UG 2026 विवाद को लेकर देशभर में छात्र प्रदर्शन कर रहे थे. दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी कई छात्र संगठन लगातार धरने पर बैठे रहे. विपक्ष ने भी संसद के भीतर इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की. कई दिनों तक संसद की कार्यवाही इस मुद्दे पर बाधित रही. इसी दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी कांग्रेस सांसदों के साथ प्रधानमंत्री आवास के बाहर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचे, जिसके बाद इस मुद्दे ने और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ लिया.
किसानों के आंदोलन की भी हुई चर्चा
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 2021 के किसान आंदोलन की भी चर्चा तेज हो गई है. तब करीब एक साल तक चले आंदोलन के बाद केंद्र सरकार ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का फैसला किया था. अब NEET विवाद के बीच शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भी केंद्र सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है.


