देश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर हमलों का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है. इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने AI आधारित साइबर खतरों से निपटने के लिए देश के साइबर सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं.
सरकार का कहना है कि AI तकनीक का दुरुपयोग कर अब स्वचालित साइबर हमले, पहचान संबंधी धोखाधड़ी, बहुभाषी फिशिंग और सिस्टम की कमजोरियों का तेजी से फायदा उठाने जैसे खतरे बढ़ रहे हैं. इन चुनौतियों से निपटने के लिए कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक रणनीति लागू की जा रही है.
CERT-In ने तैनात किए AI आधारित सुरक्षा सिस्टम
सरकार के अनुसार, इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने AI आधारित सुरक्षा प्रणालियां विकसित और तैनात की हैं.
इन प्रणालियों की मदद से:
- दुर्भावनापूर्ण (Malicious) वेबसाइटों की पहचान की जाती है.
- फिशिंग गतिविधियों का समय रहते पता लगाया जाता है.
- संभावित साइबर हमलों पर त्वरित कार्रवाई की जाती है.
इसके अलावा सार्वजनिक डिजिटल परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए AI आधारित वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म भी विकसित किए गए हैं, जिससे विभिन्न संस्थानों को समय पर सुरक्षा अलर्ट उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
जून-जुलाई 2026 में आयोजित हुए 10 विशेष साइबर अभ्यास
सरकार ने बताया कि जून और जुलाई 2026 के दौरान CERT-In ने “फ्रंटियर AI आधारित साइबर खतरों के खिलाफ लचीलापन विकसित करना” विषय पर 10 विशेष साइबर सुरक्षा अभ्यास और ड्रिल आयोजित किए.
इन अभ्यासों में:
- 345 सरकारी और निजी संगठनों ने भाग लिया.
- कुल 1,470 प्रतिभागी शामिल हुए.
इनमें बिजली, दूरसंचार, बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल थे.
AI सुरक्षा विशेषज्ञ तैयार करने के लिए CSPAI कार्यक्रम
सरकार ने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के कौशल विकास के लिए Certified Security Professional in Artificial Intelligence (CSPAI) कार्यक्रम भी शुरू किया है.
इसके अलावा CERT-In उद्योग जगत के सहयोग से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर सरकारी और निजी क्षेत्र के साइबर सुरक्षा पेशेवरों को AI आधारित सुरक्षा तकनीकों का प्रशिक्षण दे रहा है.
कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश किए जारी
AI आधारित साइबर खतरों से बचाव के लिए सरकार ने कई दिशा-निर्देश और एडवाइजरी भी जारी की हैं.
इनमें शामिल हैं:
- AI-सहायता प्राप्त सुरक्षा परीक्षण
- सतत साइबर निगरानी
- पैच प्रबंधन
- डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा
- जनरेटिव AI का सुरक्षित उपयोग
- स्मार्ट सिटी साइबर सुरक्षा
- डीपफेक से बचाव
- सप्लाई चेन सुरक्षा
सरकार का कहना है कि इन उपायों का उद्देश्य बदलते साइबर खतरों के बीच डिजिटल प्रणालियों को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है.
सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम पर सरकार का जोर
केंद्र सरकार के अनुसार, इन सभी पहलों का उद्देश्य भारत में एक सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है. साथ ही AI आधारित साइबर हमलों के खिलाफ देश की साइबर रेजिलिएंस को और मजबूत किया जा रहा है ताकि भविष्य में उभरने वाले डिजिटल खतरों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके.
स्रोत: भारत सरकार एवं इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In).


