गुरुग्राम: दिल्ली-NCR के तेजी से विकसित हो रहे गुरुग्राम में अब लोगों को प्रकृति और आध्यात्मिक शांति का एक नया ठिकाना मिला है. अरावली की हरियाली के बीच देश का पहला ‘तीर्थंकर वनम्’ तैयार किया गया है. करीब 5 एकड़ में विकसित इस वनम् का शनिवार को हरियाणा के पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव मंत्री राव नरबीर सिंह ने उद्घाटन किया.
जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (JITO) के गुरुग्राम चैप्टर फाउंडेशन की ओर से विकसित किए गए इस वनम् को जैन समाज के 24 तीर्थंकरों की स्मृति को समर्पित किया गया है. यहां 24 अलग-अलग ध्यान स्थल बनाए गए हैं, जहां लोग प्रकृति के बीच ध्यान और योग कर सकेंगे.
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24 तीर्थंकर, 24 ध्यान स्थल
तीर्थंकर वनम् की सबसे खास बात यहां बनाए गए 24 ध्यान स्थल हैं. प्रत्येक ध्यान स्थल जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से एक को समर्पित है. हर स्थल के आसपास तीन-तीन पेड़ लगाए गए हैं. इस तरह वनम् में आध्यात्मिक स्मरण के साथ पौधरोपण और हरियाली को भी जोड़ा गया है. आयोजकों के मुताबिक, इस पूरे परिसर को करीब 10 महीने में विकसित किया गया है और इसे तैयार करने में दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं.
सूर्योदय से पहले भी कर सकेंगे ध्यान
तीर्थंकर वनम् को इस तरह विकसित किया गया है कि लोग यहां प्रकृति के बीच कुछ समय शांति से बिता सकें. यहां आने वाले लोग सूर्योदय से पहले ध्यान और योग भी कर सकते हैं. अरावली की पहाड़ियों और हरियाली के बीच बना यह परिसर शहर की भागदौड़ से अलग शांत वातावरण उपलब्ध कराने की कोशिश है.
सरकारी वन भूमि पर हुआ विकास
तीर्थंकर वनम् को वन विभाग के साथ हुए एमओयू के तहत आवंटित सरकारी वन भूमि पर विकसित किया गया है. उद्घाटन के दौरान मंत्री राव नरबीर सिंह ने परिसर का दौरा किया और पौधरोपण भी किया. उन्होंने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के लिए JITO की इस पहल की सराहना की और लोगों से पौधरोपण तथा प्रकृति संरक्षण से जुड़ने की अपील की.
यहां आने पर मिलेगी सकारात्मक ऊर्जा
JITO गुरुग्राम चैप्टर के अध्यक्ष संजय जैन ने कहा कि तीर्थंकर वनम् प्रकृति और आध्यात्मिकता को जोड़ने वाला एक नया प्रयोग है. उन्होंने कहा कि अरावली की हरियाली के बीच विकसित यह परिसर लोगों को सकारात्मक अनुभव देने का काम करेगा. उन्होंने कहा कि आज लगाया गया यह बीज आने वाले समय में बड़े वृक्ष का रूप लेगा और लोगों को महापुरुषों के जीवन एवं संदेश की याद दिलाएगा.
पर्यावरण संरक्षण के साथ आध्यात्मिक चेतना का संदेश
उद्घाटन के बाद राव नरबीर सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि तीर्थंकर वनम् पर्यावरण संरक्षण के साथ आध्यात्मिक चेतना का भी संदेश देता है. उन्होंने कहा कि 24 ध्यान स्थलों वाला यह वनम् जैन समाज के 24 तीर्थंकरों की स्मृति को समर्पित है. मंत्री के मुताबिक, वन्यजीव सुरक्षा सप्ताह के दौरान शुरू हुई यह पहल लोगों को प्रकृति, पौधरोपण और वन्यजीवों की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने के लिए प्रेरित करेगी.
गुरुग्राम के लिए क्यों खास है यह वनम्?
गुरुग्राम की पहचान जहां आधुनिक इमारतों, कॉरपोरेट हब और तेज रफ्तार जिंदगी से जुड़ी है, वहीं अरावली में विकसित यह वनम् शहर के बीच प्रकृति, ध्यान और आध्यात्मिकता का नया स्पेस तैयार करता है. 24 ध्यान स्थल, पौधरोपण और अरावली की प्राकृतिक हरियाली इसे सामान्य पार्कों से अलग अनुभव देने की कोशिश करते हैं. आने वाले समय में यह स्थानीय लोगों के साथ-साथ प्रकृति और आध्यात्मिकता में रुचि रखने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है.
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