Hathras Urban Center: उत्तर प्रदेश में एक और आधुनिक शहर बसाने की तैयारी तेज हो गई है. यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ‘नया हाथरस’ यानी हाथरस अर्बन सेंटर विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है. यह परियोजना करीब 4,000 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली होगी और इसे भविष्य के स्मार्ट और योजनाबद्ध शहर के रूप में तैयार किया जाएगा.
9 महीने में बनेगा मास्टर प्लान
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट लिमिटेड को सौंपी गई है. कंपनी को 9 महीने के भीतर विस्तृत योजना तैयार करनी होगी. इसके लिए यीडा अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें प्रारंभिक सर्वे और निरीक्षण रिपोर्ट पर चर्चा की गई है.
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2041 विजन के साथ होगा विकास
‘नया हाथरस’ को वर्ष 2041 के विजन के तहत विकसित किया जाएगा. मास्टर प्लान में आने वाले 20 वर्षों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक विकास, जनसंख्या वृद्धि, इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण संतुलन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को प्राथमिकता दी जाएगी. योजना में जीआईएस तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे विकास अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित हो सके.
66 गांवों की जमीन पर बसेगा नया शहर
यह नया शहर हाथरस के 66 गांवों की जमीन पर बसाया जाएगा, जो यीडा के अधिसूचित क्षेत्र में आते हैं. कनेक्टिविटी के लिहाज से यह इलाका काफी मजबूत है, क्योंकि यह यमुना एक्सप्रेसवे, एनएच-93 और एसएच-33 से जुड़ा हुआ है. साथ ही हाथरस जंक्शन रेलवे नेटवर्क का भी अहम केंद्र है.
उद्योगों को मिलेगा नया प्लेटफॉर्म
ऐतिहासिक रूप से हाथरस एक बड़ा औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र रहा है, लेकिन समय के साथ इसकी चमक फीकी पड़ गई. वर्तमान में यहां 10,000 से ज्यादा लघु और मध्यम उद्योग पंजीकृत हैं. नए शहर के विकास से इन उद्योगों को आधुनिक सुविधाएं और बेहतर बाजार मिलने की उम्मीद है.
चुनौतियां भी कम नहीं
फिलहाल इस क्षेत्र में आंतरिक सड़कों, बिजली, जल आपूर्ति, सीवरेज, स्वास्थ्य सेवाओं और मनोरंजन सुविधाओं की कमी जैसी समस्याएं हैं. लेकिन नई योजना के तहत इन सभी कमियों को दूर करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
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नोएडा-गुरुग्राम जैसा मॉडल
यीडा का लक्ष्य ‘नया हाथरस’ को नोएडा और गुरुग्राम की तर्ज पर विकसित करना है, जहां आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और बेहतर जीवनशैली का संतुलन देखने को मिलता है. अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले महीनों में निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर ड्राफ्ट मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जो इस ‘ड्रीम सिटी’ की दिशा और दशा तय करेगा.


