Tenant’s Rights Rules: किराए का मकान छोड़ते समय कई किरायेदारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी सिक्योरिटी मनी वापस लेने को लेकर आती है. कई बार मकान मालिक कमरे की सफाई, मरम्मत, बिजली-पानी के बकाया या दूसरे खर्चों का हवाला देकर पूरी रकम रोक लेते हैं. कुछ मामलों में किरायेदार से एडवांस में लिया गया अतिरिक्त किराया भी वापस नहीं किया जाता. ऐसे समय में सवाल उठता है कि क्या मकान मालिक मनमाने तरीके से पैसा रोक सकता है और किरायेदार के पास इसे वापस पाने के लिए क्या कानूनी रास्ता है.
भारत में किरायेदारी से जुड़े नियम हर जगह एक जैसे नहीं हैं. राज्य के लागू कानून, किराए का एग्रीमेंट और दोनों पक्षों के बीच तय शर्तें विवाद में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इसलिए किसी एक नियम को पूरे देश में लागू मानना सही नहीं होगा.
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सबसे पहले किराए का एग्रीमेंट देखें
अगर मकान मालिक सिक्योरिटी मनी वापस नहीं कर रहा है तो सबसे पहले रेंट एग्रीमेंट निकालें. इसमें सिक्योरिटी की रकम, एडवांस किराया, नोटिस पीरियड, मकान खाली करने की शर्तें और कटौती से जुड़े नियम लिखे हो सकते हैं.
एग्रीमेंट में अगर साफ लिखा है कि मकान खाली करते समय बकाया रकम या वास्तविक नुकसान की कटौती के बाद बाकी सिक्योरिटी वापस की जाएगी, तो उसी आधार पर मकान मालिक से रकम का हिसाब मांग सकते हैं.
मॉडल टेनेंसी एक्ट में भी लिखित रेंट एग्रीमेंट की व्यवस्था प्रस्तावित है, जिसमें किराया, किरायेदारी की अवधि, सिक्योरिटी डिपॉजिट और दूसरी शर्तों का उल्लेख होना चाहिए.
क्या मकान मालिक पूरी सिक्योरिटी रोक सकता है?
सिर्फ मनमाने तरीके से पूरी सिक्योरिटी मनी रोक लेना सामान्य तौर पर विवाद का विषय बन सकता है. अगर मकान मालिक किसी नुकसान, बकाया बिल या अन्य रकम की वजह से पैसा काट रहा है तो किरायेदार उससे उसका स्पष्ट हिसाब और उपलब्ध प्रमाण मांग सकता है.
मॉडल टेनेंसी एक्ट, 2021 के प्रस्तावित प्रावधानों में सिक्योरिटी डिपॉजिट को आवासीय संपत्ति के मामले में अधिकतम दो महीने के किराए तक सीमित करने और मकान खाली होने पर उचित कटौती के बाद सिक्योरिटी लौटाने की व्यवस्था बताई गई है. लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह Model Act है, पूरे भारत में अपने-आप लागू केंद्रीय कानून नहीं. इसे राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनाने के लिए भेजा गया था.
एक्स्ट्रा किराया नहीं लौटाने पर क्या करें?
मान लीजिए आपने मकान खाली करते समय एक महीने का अतिरिक्त किराया दिया था और वह अवधि पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हुई. ऐसी स्थिति में पहले एग्रीमेंट देखें कि अतिरिक्त रकम किस उद्देश्य से ली गई थी और क्या वह एडजस्ट या रिफंड होनी थी.
मकान मालिक से फोन पर बहस करने के बजाय WhatsApp, SMS या ईमेल के जरिए लिखित रूप में रकम का हिसाब और रिफंड मांगना बेहतर है. बातचीत का रिकॉर्ड बाद में विवाद की स्थिति में उपयोगी हो सकता है.
मकान मालिक को लिखित नोटिस भेजें
अगर बातचीत से समस्या हल नहीं होती है तो मकान मालिक को एक औपचारिक लिखित मांग भेजी जा सकती है. इसमें सिक्योरिटी मनी या अतिरिक्त किराए की कुल रकम, मकान खाली करने की तारीख और वापस की जाने वाली रकम का विवरण दें.
साथ ही यह भी लिखें कि अगर कोई कटौती की गई है तो उसका कारण और खर्च का विवरण उपलब्ध कराया जाए. रकम वापस करने के लिए उचित समय सीमा भी दी जा सकती है.
कौन से सबूत संभालकर रखें?
किरायेदारी से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें. इनमें रेंट एग्रीमेंट, सिक्योरिटी मनी का भुगतान प्रमाण, बैंक ट्रांजैक्शन, UPI रिकॉर्ड, किराए की रसीद, बिजली-पानी के बिल और मकान खाली करते समय कमरे की फोटो या वीडियो शामिल हो सकते हैं.
कमरा छोड़ते समय मीटर रीडिंग और कमरे की स्थिति की फोटो लेना भी उपयोगी हो सकता है. इससे बाद में मकान मालिक द्वारा पुराने नुकसान का दावा किए जाने पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है.
विवाद बढ़ने पर कहां शिकायत करें?
अगर मकान मालिक लिखित मांग के बावजूद रकम नहीं लौटाता है तो आगे का रास्ता आपके राज्य में लागू किरायेदारी कानून और मामले की प्रकृति पर निर्भर करेगा.
जहां Model Tenancy Act के अनुरूप राज्य कानून लागू है, वहां Rent Authority, Rent Court और Rent Tribunal जैसी व्यवस्था हो सकती है. केंद्र सरकार के अनुसार Model Tenancy Act में किरायेदारी विवादों के लिए तीन स्तर की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है.
अन्य मामलों में लागू राज्य कानून और सामान्य दीवानी कानून के तहत उचित कानूनी उपाय उपलब्ध हो सकते हैं. Transfer of Property Act, 1882 में भी लीज से जुड़े अधिकारों और दायित्वों के प्रावधान हैं, लेकिन वास्तविक विवाद में कौन सा कानून और कौन सा मंच लागू होगा, यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है.
पुलिस में शिकायत कब करें?
सिर्फ सिक्योरिटी मनी वापस न करने का विवाद अपने-आप में हर मामले में पुलिस का मामला नहीं बन जाता. यह अक्सर किरायेदारी और पैसे की वसूली से जुड़ा विवाद होता है.
हालांकि अगर मामले में धोखाधड़ी, धमकी, जबरन कब्जा, सामान रोकना या कोई अन्य आपराधिक गतिविधि शामिल हो तो परिस्थितियों के अनुसार पुलिस से संपर्क किया जा सकता है. ऐसे मामलों में कानूनी सलाह लेना बेहतर रहेगा.
किरायेदार इन गलतियों से बचें
मकान छोड़ते समय चाबी सौंपने से पहले बकाया किराए और बिलों का हिसाब साफ कर लें. मकान मालिक से लिखित रूप में यह पुष्टि लेने की कोशिश करें कि उसे कितनी रकम मिली और कितनी सिक्योरिटी वापस करनी है.
सिक्योरिटी के बदले आखिरी महीने का किराया खुद से रोक लेना भी सही तरीका नहीं है, जब तक एग्रीमेंट या मकान मालिक के साथ स्पष्ट सहमति ऐसा करने की अनुमति न देती हो.
अगर मकान मालिक सिक्योरिटी मनी या अतिरिक्त किराया वापस नहीं कर रहा है तो सबसे पहले रेंट एग्रीमेंट और भुगतान के रिकॉर्ड देखें. इसके बाद लिखित रूप में रकम का हिसाब मांगें और रिफंड की मांग करें. जरूरत पड़ने पर औपचारिक कानूनी नोटिस और राज्य में लागू किरायेदारी कानून के तहत उपलब्ध मंच का सहारा लिया जा सकता है.
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सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Model Tenancy Act को पूरे भारत में लागू एक समान कानून न समझें. किरायेदार के अधिकार आपके राज्य के लागू कानून, रेंट एग्रीमेंट और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर कर सकते हैं. बड़ी रकम या जटिल विवाद होने पर स्थानीय वकील से सलाह लेना सुरक्षित विकल्प है.


