Namo Shakti Expressway: गुजरात में प्रस्तावित नमो शक्ति एक्सप्रेसवे को राज्य की कनेक्टिविटी के लिहाज से अहम परियोजना माना जा रहा है. करीब 430 किलोमीटर लंबे इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का उद्देश्य गुजरात के अलग-अलग क्षेत्रों को प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ना है. इसके जरिए अमृतसर-जामनगर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे कॉरिडोर से संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है. हालांकि, बनासकांठा से दिल्ली का सफर 8 से 9 घंटे में पूरा होने और दूरी घटकर 720 से 740 किलोमीटर होने के दावों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है.
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क्या है नमो शक्ति एक्सप्रेसवे का प्रस्ताव?
प्रस्तावित नमो शक्ति एक्सप्रेसवे गुजरात के बनासकांठा जिले के दीसा से अमरेली जिले के पीपावाव पोर्ट तक बनाया जाना है. इसकी लंबाई करीब 430 किलोमीटर बताई गई है. परियोजना का उद्देश्य राज्य में तेज और सुगम सड़क परिवहन के साथ औद्योगिक तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. प्रस्ताव के मुताबिक, भविष्य में यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक्सप्रेसवे को चार लेन के बजाय छह से आठ लेन तक विकसित करने की योजना है. इसकी अनुमानित लागत करीब 39,120 करोड़ रुपये बताई गई है.
बनासकांठा से दिल्ली का सफर कैसे होगा आसान?
बनासकांठा से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को प्रस्तावित एक्सप्रेसवे के जरिए दूसरे प्रमुख हाईवे से जुड़ने का विकल्प मिल सकता है. योजना के अनुसार, दीसा से आगे थराद के रास्ते अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे से संपर्क स्थापित होगा. इसके बाद राजस्थान और हरियाणा के विभिन्न हिस्सों से होते हुए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के जरिए दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचने का रास्ता मिल सकता है. हालांकि, यात्रा का वास्तविक मार्ग संबंधित इंटरचेंज, चालू सड़क खंडों और अंतिम स्वीकृत योजना पर निर्भर करेगा.
800 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी घटने का दावा
दी गई परियोजना संबंधी जानकारी में दावा किया गया है कि फिलहाल बनासकांठा से दिल्ली के बीच सड़क मार्ग की दूरी करीब 800 से 830 किलोमीटर है. प्रस्तावित नए कॉरिडोर से यह दूरी घटकर 720 से 740 किलोमीटर हो सकती है. इसी तरह, वर्तमान में 14 से 16 घंटे लगने वाले सफर को 8 से 9 घंटे में पूरा करने का अनुमान जताया गया है. लेकिन इन आंकड़ों की पुष्टि अंतिम रूट, प्रवेश और निकास बिंदुओं तथा एक्सप्रेसवे के चालू होने के बाद ही हो सकेगी.
गुजरात के किन इलाकों को मिल सकता है फायदा?
प्रस्तावित एक्सप्रेसवे से गुजरात के कई जिलों और औद्योगिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है. इसमें बनासकांठा, पाटन, सुरेंद्रनगर, मोरबी, राजकोट, जामनगर, द्वारका, पोरबंदर, जूनागढ़, सोमनाथ, अमरेली और बोटाद जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है. बेहतर सड़क संपर्क से औद्योगिक इकाइयों, बंदरगाहों और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सकती है. खास तौर पर राजकोट और सौराष्ट्र के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों को माल ढुलाई में लाभ मिलने की संभावना है.
अमृतसर-जामनगर और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ाव
इस परियोजना की अहमियत प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से संभावित संपर्क के कारण भी बढ़ जाती है. अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे के जरिए गुजरात का संपर्क राजस्थान, हरियाणा और पंजाब की दिशा में बेहतर हो सकता है. वहीं, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ाव दिल्ली-एनसीआर और देश के अन्य प्रमुख शहरों तक पहुंच आसान बना सकता है. इससे लॉजिस्टिक्स, परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. हालांकि, अलग-अलग एक्सप्रेसवे के बीच वास्तविक कनेक्टिविटी अंतिम स्वीकृत रूट और इंटरचेंज पर निर्भर करेगी.
DPR और निर्माण की समयसीमा पर क्या है अपडेट?
दी गई जानकारी के मुताबिक, परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार किए जाने और आगे की प्रक्रिया के लिए बोलियां आमंत्रित किए जाने का दावा किया गया है. इसे 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य भी बताया गया है. हालांकि, परियोजना की मौजूदा स्थिति, निर्माण शुरू होने की तारीख और 2029 की समयसीमा की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है. इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित एक्सप्रेसवे परियोजना से जुड़ी जानकारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
उद्योग और पर्यटन को मिल सकती है नई रफ्तार
नमो शक्ति एक्सप्रेसवे विकसित होने पर गुजरात के औद्योगिक क्षेत्रों, बंदरगाहों और पर्यटन स्थलों के बीच सड़क संपर्क बेहतर हो सकता है. इससे माल परिवहन का समय घटाने, व्यापारिक गतिविधियां बढ़ाने और सौराष्ट्र क्षेत्र में पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है. फिलहाल यात्रियों को बनासकांठा से दिल्ली के सफर में 8 से 9 घंटे लगने के दावे को संभावित अनुमान के तौर पर ही देखना चाहिए. वास्तविक समय और दूरी का आकलन परियोजना पूरी होने और पूरा मार्ग चालू होने के बाद ही किया जा सकेगा.
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