नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर (National Capital Region) की तस्वीर आने वाले 5 सालों में पूरी तरह बदलने वाली है. केंद्र सरकार एनसीआर में 5,000 करोड़ रुपये की लागत से 4 नई ‘नमो सिटी’ (Namo City) विकसित करने जा रही है. इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य दिल्ली पर बढ़ रहे जनसंख्या और यातायात के भारी दबाव को कम करना है.
यह महत्वपूर्ण जानकारी केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना बोर्ड (NCRPB) की एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद दी. इस बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राजस्थान के नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा भी शामिल हुए.
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कहां बसाई जाएंगी ये 4 नई नमो सिटी?
इस घोषणा के बाद से ही लोगों में सबसे बड़ी उत्सुकता इस बात को लेकर है कि ये नए शहर आखिर कहाँ बनेंगे. केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के अनुसार, अभी इन शहरों की सटीक लोकेशन तय नहीं हुई है, लेकिन इन्हें चुनने का फॉर्मूला तैयार कर लिया गया है.
लोकेशन चुनने का फॉर्मूला
दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की सरकारें अपने-अपने राज्यों से 3-3 संभावित लोकेशन के प्रस्ताव केंद्र को भेजेंगी. इन प्राप्त प्रस्तावों में से हर राज्य (या केंद्र शासित प्रदेश) के लिए एक-एक बेहतरीन जगह को फाइनल किया जाएगा. दिल्ली के मामले में कोई नया शहर नहीं, बल्कि एक आधुनिक ‘सब-सिटी’ (Sub-City) विकसित की जाएगी. इन नए शहरों का नाम ‘नमो सिटी’ रखा गया है, जो कि एनसीआर में चलने वाली आधुनिक ‘नमो भारत’ ट्रेनों की तर्ज पर आधारित है.
RRTS कॉरिडोर के पास विकास और कनेक्टिविटी
नमो सिटी को बसाने के पीछे सरकार की रणनीति बेहद साफ है. इन शहरों को क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) और अन्य प्रमुख परिवहन नेटवर्क (Highways/Expressways) के आसपास ही डेवलप किया जाएगा.इससे फायदा यह होगा कि इन शहरों में रहने वाले लोगों को दिल्ली और एनसीआर के अन्य हिस्सों के लिए बेहतरीन और रफ्तार से भरी कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे मुख्य दिल्ली पर से ट्रैफिक और आबादी का लोड कम होगा.
NCR को 3 जोन में बांटने की तैयारी
एक और बड़े फैसले के तहत, एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण और शहरी नियोजन (Urban Planning) को अधिक प्रभावी बनाने के लिए पूरे क्षेत्र को तीन अलग-अलग जोन में बांटने की तैयारी है. इसमें एक ‘कोर NCR’ जोन भी शामिल होगा. इस विभाजन से प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए इलाके के हिसाब से सटीक और सख्त कदम उठाए जा सकेंगे.
कब तक लागू होगा ‘NCR प्लान-2041’?
बैठक में NCR Regional Plan-2041 पर भी विस्तार से चर्चा की गई. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि अधिकांश मुद्दों पर सभी पक्षों के बीच सहमति बन चुकी है. हालांकि, अंतिम क्षेत्रीय योजना को औपचारिक रूप से जारी होने में अभी लगभग दो महीने का समय लग सकता है. अब सबकी नजरें चारों राज्यों द्वारा भेजे जाने वाले प्रस्तावों पर टिकी हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि हरियाणा, यूपी, राजस्थान और दिल्ली सरकारें किन इलाकों के नाम आगे बढ़ाती हैं, क्योंकि जिन भी इलाकों का चयन होगा, आने वाले समय में वहां विकास की रफ्तार और प्रॉपर्टी के दाम आसमान छूने वाले हैं.


