छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित तीजन बाई का निधन हो गया. वह लंबे समय से बीमार थीं और रायपुर स्थित एम्स (AIIMS) में उनका इलाज चल रहा था. आज तड़के लगभग 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.
उनके निधन से भारतीय लोककला और सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है.
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पंडवानी गायन को दिलाई वैश्विक पहचान
तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली मंच प्रस्तुति और अनूठी शैली से पंडवानी लोकगायन को देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में नई पहचान दिलाई.
महाभारत की कथाओं को जीवंत अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी कला ने उन्हें भारतीय लोक परंपरा की सबसे प्रतिष्ठित कलाकारों में शामिल किया.
कई प्रतिष्ठित सम्मानों से हुईं सम्मानित
भारतीय लोककला में उनके असाधारण योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें कई प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान प्रदान किए.
- पद्म श्री
- पद्म भूषण
- पद्म विभूषण
पद्म विभूषण देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान है, जिससे उन्हें भारतीय लोकसंस्कृति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए सम्मानित किया गया था.
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भारतीय लोकसंस्कृति की अमूल्य धरोहर थीं तीजन बाई
तीजन बाई ने अपने लंबे सांस्कृतिक सफर के दौरान देश और विदेश में अनेक मंचों पर पंडवानी की प्रस्तुति देकर भारतीय लोक परंपरा का गौरव बढ़ाया. उनकी कला ने नई पीढ़ी के कलाकारों को भी लोककलाओं से जुड़ने की प्रेरणा दी.
उनके निधन से भारतीय लोकसंगीत और सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षति हुई है.
Source: Akasvani News


