नई दिल्ली: भारत की स्टार शटलर और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू ने रविवार को बैडमिंटन की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है. उन्होंने जापान ओपन के रोमांचक फाइनल मुकाबले में स्थानीय स्टार और तीन बार की विश्व चैंपियन अकाने यामागुची को सीधे गेम में मात देकर पहली बार सुपर 750 टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया. इसके साथ ही सिंधू जापान ओपन का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं.
31 वर्षीय सिंधू ने फाइनल मैच में कमाल का रणनीतिक अनुशासन और संयम दिखाते हुए यामागुची को 21-17, 21-17 से शिकस्त दी. साल 2024 में सैयद मोदी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीतने के बाद, दो साल से भी अधिक समय में सिंधू का यह पहला इंटरनेशनल टाइटल है. 2019 में विश्व चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक जीतने के बाद इसे सिंधू की सबसे बड़ी खिताबी जीत माना जा रहा है.
ताकत नहीं, रणनीति से जीती बाजी
छठी बार जापान ओपन के फाइनल में खेल रहीं यामागुची के खिलाफ सिंधू का पिछला रिकॉर्ड चुनौतीपूर्ण था. पिछले चार साल में सिंधू किसी पूर्ण मैच में जापानी खिलाड़ी को नहीं हरा सकी थीं (इससे पहले साल की शुरुआत में मलेशिया ओपन में यामागुची रिटायर्ड हर्ट हुई थीं). लेकिन रविवार को सिंधू एक अलग ही रंग में नजर आईं. सिंधू ने मैच की शुरुआत से ही दबदबा बनाए रखा. उन्होंने केवल ताकत पर निर्भर न रहकर रणनीतिक खेल दिखाया और शटल को नेट के करीब रखा. इससे यामागुची को शटल ऊपर उठाने पर मजबूर होना पड़ा, जिसका फायदा उठाकर सिंधू ने अपने पसंदीदा क्रॉस-कोर्ट और बॉडी स्मैश दागे.
रोमांचक रैलियों का मुकाबला
एक समय यामागुची 11-9 से आगे थीं, लेकिन ब्रेक के बाद सिंधू ने 36 शॉट की लंबी रैली जीतकर 11-11 से बराबरी की. इसके बाद 38 शॉट की एक और रैली देखने को मिली. अंत में सिंधू ने सटीक क्रॉस-कोर्ट स्मैश और यामागुची की गलतियों का फायदा उठाकर पहला गेम 21-17 से जीता. सिंधू ने अपनी लय बरकरार रखी और शुरुआत में ही 44 शॉट की थका देने वाली रैली जीतकर बढ़त मजबूत की. ब्रेक तक सिंधू 11-7 से आगे थीं. हालांकि यामागुची ने स्कोर 12-14 करके वापसी की कोशिश की, लेकिन सिंधू ने लगातार दो दमदार स्मैश लगाकर स्कोर 17-14 कर दिया.
वीडियो रिव्यू और ऐतिहासिक पल
मैच के अंतिम क्षणों में जब सिंधू के पास चैंपियनशिप पॉइंट था, तब यामागुची का आखिरी रिटर्न कोर्ट से बाहर चला गया. जापानी खिलाड़ी ने इस पर वीडियो रिव्यू लिया, लेकिन लाइन कॉल सिंधू के पक्ष में रहा. फैसला आते ही सिंधू की खुशी का ठिकाना नहीं रहा और उन्होंने कोर्ट पर ही अपने कोच को गले लगा लिया. पिछले चार साल के सूखे को खत्म करते हुए सिंधू ने किसी पूर्ण मैच में यामागुची के खिलाफ अपनी आखिरी जीत (2022 थाईलैंड ओपन के बाद) दर्ज की है. भारतीय बैडमिंटन के लिए यह जीत एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है.


