UP electricity supply: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भीषण गर्मी और बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए प्रदेश में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि गांव हो या शहर, किसी भी क्षेत्र में बिजली संकट की स्थिति नहीं बननी चाहिए. इसके लिए सभी स्तरों पर लगातार मॉनिटरिंग और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि आम जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े.
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बढ़ती गर्मी पर CM योगी का बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन और डिस्कॉम अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के निर्देश दिए. अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की उत्पादन क्षमता बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है. इसके साथ ही गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है, जिससे बिजली आपूर्ति को मजबूती मिल रही है.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को और अधिक मजबूत व भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में तकनीकी बाधाओं को न्यूनतम रखना बेहद जरूरी है. प्रदेश में इस समय 60,858 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनें और 715 उपकेंद्र संचालित हो रहे हैं. ट्रांसमिशन नेटवर्क की उपलब्धता 99.30 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो बेहतर व्यवस्था का संकेत माना जा रहा है.
ट्रांसफॉर्मर खराब हुआ तो तुरंत कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने बिजली वितरण व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि फीडर वाइज मॉनिटरिंग कर जिम्मेदारी तय की जाए और ट्रांसफॉर्मर खराब होने या फीडर बाधित होने की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाए. साथ ही आंधी-तूफान जैसी आपदा की स्थिति में फील्ड स्तर पर त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखा जाए ताकि बिजली आपूर्ति जल्द से जल्द बहाल की जा सके.समीक्षा बैठक में बताया गया कि 4, 7 और 15 मई को आए आंधी-तूफान के कारण प्रदेश के 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए थे. हालांकि विभाग ने तेजी से मरम्मत और बहाली का कार्य कर बिजली व्यवस्था सामान्य की. मुख्यमंत्री ने भूमिगत केबल वाले क्षेत्रों में खुदाई से पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति लेने के निर्देश दिए ताकि भविष्य में तकनीकी नुकसान और बाधाएं कम हो सकें.
30 हजार मेगावाट पार पहुंची बिजली डिमांड
ऊर्जा विभाग ने जानकारी दी कि अप्रैल और मई में बढ़ती गर्मी के कारण बिजली मांग में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है. 15 अप्रैल से 22 मई के बीच प्रदेश की औसत बिजली मांग 501 मिलियन यूनिट प्रतिदिन से बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन पहुंच गई. वहीं पीक डिमांड 30,339 मेगावाट तक दर्ज की गई, जिससे प्रदेश में बिजली खपत का नया स्तर सामने आया है.
समीक्षा बैठक में यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश 20 से 22 मई के बीच देश में सर्वाधिक बिजली मांग पूरी करने वाले राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा. मुख्यमंत्री ने इसे ऊर्जा विभाग की बेहतर कार्यप्रणाली का परिणाम बताया. साथ ही ट्रांसफॉर्मर क्षति में भी बड़ी कमी दर्ज की गई है, जहां पहले 429 पावर ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त होते थे, वहीं अब यह संख्या घटकर केवल 87 रह गई है.
स्मार्ट मीटर से लेकर बिजली सप्लाई तक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भविष्य की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति पर विशेष जोर दिया. वर्ष 2029 तक बढ़ती बिजली मांग को पूरा करने के लिए 10,719 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने की योजना पर कार्य चल रहा है. इसमें विंड एनर्जी, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड हाइड्रो और हाइब्रिड ऊर्जा परियोजनाओं को शामिल किया गया है.
स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिजली बिल मिलना चाहिए. प्रदेश में अब तक 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. जून 2026 से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को हर महीने 1 से 10 तारीख के बीच पोस्टपेड आधार पर बिल जारी किए जाएंगे. यह बिल एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
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मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उपभोक्ताओं को सही और समयबद्ध जानकारी दी जाए. उन्होंने कहा कि केवल शिकायत दर्ज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों को यह भी बताया जाए कि समस्या का समाधान कब तक होगा. मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेशवासियों को बेहतर, भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है.
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