विवाह को हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में जीवन का सबसे शुभ संस्कार माना गया है. यह केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कारों और भविष्य का मिलन होता है. यही कारण है कि शास्त्रों में विवाह से पहले सही मुहूर्त देखने पर खास जोर दिया गया है. माना जाता है कि गलत समय पर किया गया विवाह वैवाहिक जीवन में तनाव, मतभेद और बाधाओं का कारण बन सकता है, जबकि शुभ मुहूर्त में हुआ विवाह जीवन को स्थिरता और सुख प्रदान करता है.
क्या होता है विवाह मुहूर्त?
विवाह मुहूर्त वह शुभ समय होता है, जब ग्रह-नक्षत्र अनुकूल स्थिति में होते हैं. इस समय किया गया विवाह दांपत्य जीवन को मजबूत आधार देता है. ज्योतिष के अनुसार, विवाह मुहूर्त तय करते समय तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के साथ-साथ वर-वधू की कुंडली का मिलान भी किया जाता है. यह प्रक्रिया केवल परंपरा नहीं, बल्कि अनुभव और शास्त्रों पर आधारित है.
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क्या कहना है कानपुर के पंडित का
कानपुर के पंडित सुशील का कहना है कि गलत मुहूर्त में विवाह होने पर कई तरह की समस्याएं सामने आ सकती हैं. जैसे- शादी के बाद बार-बार अनबन और मानसिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता या अचानक खर्चों का बढ़ना, संतान सुख में देरी और स्वास्थ्य या पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर विवाद होते हैं.
पंडित सुशील के अनुसार, अगर विवाह के समय गुरु, शुक्र या चंद्रमा कमजोर स्थिति में हों, तो वैवाहिक सुख प्रभावित हो सकता है. इसलिए केवल तारीख नहीं, बल्कि ग्रहों की चाल को समझना बेहद जरूरी होता है.
किन ग्रहों का विवाह में होता है सबसे ज्यादा असर?
शुक्र ग्रह: प्रेम, आकर्षण और दांपत्य सुख का कारक
गुरु (बृहस्पति): विवाह की स्थिरता और विश्वास
चंद्रमा: भावनात्मक संतुलन और मानसिक शांति
मंगल: ऊर्जा और साहस, लेकिन अधिक प्रभाव से मंगल दोष बन सकता है
यदि इन ग्रहों की स्थिति अनुकूल न हो, तो सही मुहूर्त चुनकर उनके नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
विवाह मुहूर्त तय करते समय किन बातों का रखें ध्यान?
खरमास, चातुर्मास और मलमास में विवाह से बचें, इन समयों को अशुभ माना जाता है.
गुरु और शुक्र अस्त न हों, इन ग्रहों का अस्त होना विवाह के लिए अच्छा नहीं माना जाता.
नक्षत्रों का चयन – रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, अनुराधा जैसे नक्षत्र विवाह के लिए शुभ माने जाते हैं.
कुंडली मिलान – केवल गुण मिलान नहीं, बल्कि दोषों का सही विश्लेषण भी जरूरी है.
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पंडित सुशील बताते हैं कि आज भी उनके पास ऐसे कई जोड़े परामर्श के लिए आते हैं, जिनकी शादी बिना मुहूर्त देखे हुई थी.


