UP News: भारतीय रेलवे बोर्ड ने दिल्ली–वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर को प्राथमिकता देते हुए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को 2021 की डीपीआर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं. अधिकारियों के मुताबिक यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ी तो अगले दो-तीन महीनों में जमीनी स्तर पर काम शुरू होता दिखाई देगा, जिससे परियोजना को औपचारिक गति मिल जाएगी.
यूपी के किसने शहरों से गुजरेगी बुलेट ट्रेन
प्रस्तावित बुलेट ट्रेन दिल्ली (सराय काले खां) से चलकर उत्तर प्रदेश के 12 शहरों नोएडा, जेवर, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही से होते हुए वाराणसी पहुंचेगी. नई डीपीआर में स्टेशनों में बड़े बदलाव की संभावना कम बताई जा रही है, जिससे पहले से तय रूट पर ही आगे बढ़ने के संकेत मिलते हैं.
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बजट में मिले थे सात हाईस्पीड रेल परियोजना की सौगात
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में सात हाई स्पीड रेल परियोजनाओं की घोषणा की थी, जिनमें दिल्ली–वाराणसी कॉरिडोर भी शामिल है. इन परियोजनाओं पर लगभग 16 लाख करोड़ रुपये निवेश का अनुमान जताया गया है. हाई स्पीड ट्रेनों की रफ्तार 250 से 350 किलोमीटर प्रति घंटा तक रखने की योजना है, जिससे लंबी दूरी की यात्रा बेहद तेज हो सकेगी.
डीपीआर पहले से तैयार किया जा चुका है
दिल्ली–वाराणसी के अलावा वाराणसी–सिलीगुड़ी, मुंबई–पुणे, पुणे–हैदराबाद, हैदराबाद–चेन्नई, हैदराबाद–बेंगलुरु और बेंगलुरु–चेन्नई कॉरिडोर भी योजना में शामिल हैं. जिन परियोजनाओं की डीपीआर पहले से तैयार है, उनकी लागत और पूर्णता लागत को अपडेट किया जाएगा, जबकि कुछ कॉरिडोर के लिए सर्वेक्षण कार्य अभी बाकी है और उसे जल्द शुरू करने की तैयारी है.
एनएचएसआरसीएल की टीम ने यूपी का किया दौरा
परियोजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए भूमि अधिग्रहण, डिजाइन, टेंडर और अन्य प्री-कंस्ट्रक्शन गतिविधियों की सूची तैयार कर कॉन्ट्रैक्ट डॉक्यूमेंट्स बनाने के निर्देश दिए गए हैं. एनएचएसआरसीएल की टीम ने उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय कार्यालय के गठन के लिए दौरा भी किया है, ताकि स्थानीय स्तर पर समन्वय मजबूत कर कार्यों की निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके.
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बुलेट ट्रेन परियोजनाओं के लिए देश में ‘एक देश–एक मानक’ के तहत समान तकनीकी मानक तय किए जाएंगे. इन मानकों को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी एनएचएसआरसीएल को सौंपी गई है. प्रत्येक कॉरिडोर के लिए फील्ड में कोर टीम गठित होगी, मुख्यालय तय होंगे और प्रशिक्षित तकनीकी स्टाफ की तैनाती की योजना बनेगी, साथ ही साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी.


