UP News: होली का पर्व नजदीक है. देशभर में जहां होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के एक गांव में सदियों से होलिका दहन नहीं किया जाता. यह अनोखी परंपरा नानोता क्षेत्र के बरसी गांव में देखने को मिलती है, जहां लोग रंगों की होली तो खेलते हैं, लेकिन होलिका दहन से दूरी बनाए रखते हैं.
भोलेनाथ की श्रद्धा से जुड़ा ‘महा संकल्प’
गांव वालों का मानना है कि उनके गांव के बीचों-बीच स्थित प्राचीन शिव मंदिर में स्वयं भगवान शिव विराजमान हैं. इसी गहरी आस्था के चलते ग्रामीणों ने ‘महा संकल्प’ लिया कि गांव की धरती पर कभी होलिका दहन नहीं करेंगे.
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ग्रामीणों की मान्यता है कि अगर होलिका जलाई गई तो भूमि गरम हो जाएगी और इससे भगवान शिव के चरण झुलस सकते हैं. यही कारण है कि यहां करीब 5,000 वर्षों से होलिका दहन नहीं किया गया. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा उनके पूर्वजों से चली आ रही है और आने वाली पीढ़ियां भी इसे निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
महाभारत काल से जुड़ी है मंदिर की कथा
बरसी गांव का पश्चिममुखी शिव मंदिर भी अपने आप में अनोखा है. स्थानीय किंवदंतियों के अनुसार, यह मंदिर महाभारत काल में दुर्योधन द्वारा एक ही रात में बनवाया गया था. कहा जाता है कि जब भीम ने सुबह इस मंदिर को देखा, तो उन्होंने अपनी गदा से इसके मुख्य द्वार को पश्चिम दिशा की ओर मोड़ दिया. तभी से इसे देश का इकलौता पश्चिममुखी शिव मंदिर माना जाता है.
महाशिवरात्रि पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है. महाशिवरात्रि के अवसर पर हजारों श्रद्धालु यहां अभिषेक करने पहुंचते हैं. नवविवाहित जोड़े भी वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद लेने यहां आते हैं.
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होली की खुशी में नहीं आती कमी
भले ही बरसी गांव में होलिका दहन नहीं होता, लेकिन यहां होली की उमंग कम नहीं होती. ग्रामीण पास के अन्य गांवों में जाकर होलिका दहन में शामिल होते हैं, जबकि रंगों का त्योहार अपने गांव में ही पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं. बरसी गांव के लोगों का विश्वास है कि भगवान शिव की कृपा से उनकी यह अनोखी परंपरा हमेशा कायम रहेगी. उनके लिए यह सिर्फ एक मान्यता नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और संस्कृति की अमिट पहचान है.


