झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा. सुबह से ही मंदिर परिसर में लंबी कतारें देखने को मिलीं, जहां देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक कर स्पर्श पूजा की. आज स्पर्श पूजा का अंतिम दिन है. इसके बाद श्रावणी मेले के दौरान एक महीने तक मंदिर में अरघा व्यवस्था लागू रहेगी.
मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा, यातायात और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं, ताकि श्रद्धालु सुगमता से बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलार्पण कर सकें.
आज स्पर्श पूजा का अंतिम अवसर
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. श्रद्धालुओं ने पूरे विधि-विधान के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया और स्पर्श पूजा का लाभ लिया.
मंदिर प्रशासन के अनुसार 29 जुलाई को स्पर्श पूजा का अंतिम अवसर है. इसके बाद श्रावणी मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए मंदिर में अरघा व्यवस्था लागू कर दी जाएगी, जिसके माध्यम से जलार्पण कराया जाएगा.
गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व
बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पुरोहित लंबोदर महाराज ने बताया कि गुरु पूर्णिमा का दिन अत्यंत शुभ और पुण्यदायी माना जाता है. उन्होंने कहा कि इस दिन भगवान शिव की गुरु स्वरूप में पूजा करने का विशेष महत्व है.
उन्होंने यह भी बताया कि बाबा बैद्यनाथ धाम में पंचशूल के दर्शन करना भी स्पर्श पूजा के समान पुण्यदायी माना जाता है, इसलिए श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक पंचशूल के दर्शन भी कर रहे हैं.
देशभर से पहुंचे श्रद्धालु
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पश्चिम बंगाल, असम सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और कांवड़िये बाबा धाम पहुंचे.
कोलकाता से आए श्रद्धालुओं ने कहा कि बाबा बैद्यनाथ के प्रति उनकी अटूट आस्था है और गुरु पूर्णिमा के दिन दर्शन करना उनके लिए सौभाग्य की बात है.
असम से आए कांवड़ियों ने भी कहा कि वे हर वर्ष बाबा धाम पहुंचकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और उनकी यही आस्था उन्हें बार-बार यहां आने के लिए प्रेरित करती है.
श्रावणी मेले को लेकर प्रशासन पूरी तरह तैयार
श्रावणी मेले की शुरुआत को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं. मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है.
इसके साथ ही यातायात प्रबंधन, श्रद्धालुओं की आवाजाही और जलार्पण की व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं, ताकि लाखों श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो.
स्रोत: बाबा बैद्यनाथ मंदिर प्रशासन, देवघर.


