Difference Between Bar Code And QR Code: आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. दुकानों, मॉल, दफ्तरों और ऑनलाइन लेन-देन में बार कोड (Bar Code) और क्यूआर कोड (QR Code) का इस्तेमाल आम हो चुका है. हालांकि, अधिकतर लोग इन दोनों का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन इनके बीच का अंतर बहुत कम लोगों को पता होता है.अक्सर लोग बार कोड और क्यूआर कोड को एक जैसा समझ लेते हैं, जबकि दोनों की बनावट, तकनीक और उपयोग में काफी फर्क होता है. आइए जानते हैं दोनों के बीच क्या अंतर है और ये कैसे काम करते हैं.
1974 में शुरू हुआ बार कोड का इस्तेमाल
बार कोड का इस्तेमाल सबसे पहले साल 1974 में कॉमर्शियल कामों के लिए किया गया था. यह किसी भी प्रोडक्ट की जानकारी को दर्शाने का एक लीनियर तरीका होता है. बार कोड कई काली-सफेद समानांतर रेखाओं से मिलकर बना होता है, जिनके बीच की दूरी अलग-अलग होती है. इसे ऑप्टिकल स्कैनर से पढ़ा जाता है. जब किसी सामान का बार कोड स्कैन किया जाता है तो उस प्रोडक्ट से जुड़ी जानकारी जैसे कीमत, निर्माण तिथि, वजन और कंपनी की जानकारी सामने आ जाती है. इससे दुकानदार को बार-बार जानकारी बताने की जरूरत नहीं पड़ती.
1994 में आया QR कोड
क्यूआर कोड का पूरा नाम क्विक रिस्पॉन्स कोड है. इसे साल 1994 में विकसित किया गया था और यह बार कोड का ही एडवांस वर्जन माना जाता है. बार कोड जहां लाइनों के रूप में होता है, वहीं क्यूआर कोड चौकोर (Square) आकार में बना होता है.
क्यूआर कोड में बार कोड की तुलना में कहीं ज्यादा जानकारी स्टोर की जा सकती है. इसे स्कैन करते ही वेबसाइट लिंक, मोबाइल नंबर, पेमेंट डिटेल, दुकानदार का नाम या बैंक अकाउंट जैसी जानकारी तुरंत मिल जाती है. यही वजह है कि आज डिजिटल पेमेंट में इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है.
शुरुआत में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए बना था
क्यूआर कोड को शुरुआत में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के लिए बनाया गया था. इसका इस्तेमाल गाड़ियों के पार्ट्स और स्पेयर पार्ट्स को ट्रैक करने और उनकी जानकारी जल्दी हासिल करने के लिए किया जाता था. बाद में यह तकनीक दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो गई और आज यह पेमेंट से लेकर टिकट, वेबसाइट और डॉक्यूमेंट शेयरिंग तक में इस्तेमाल हो रही है.
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क्या है दोनों में मुख्य अंतर?
बार कोड में जानकारी सीमित होती है और इसे पढ़ने के लिए खास स्कैनर की जरूरत होती है, जबकि क्यूआर कोड में ज्यादा डेटा स्टोर किया जा सकता है और इसे मोबाइल फोन के कैमरे से भी आसानी से स्कैन किया जा सकता है. यही कारण है कि डिजिटल युग में क्यूआर कोड का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और यह लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है.


