Asia Farooqi Fatehpur Inspiring Story: ‘हवाएं कितनी भी तेज हों, चिराग जलते रहेंगे, जहां जज्बा हो कुछ करने का, वहां रास्ते निकलते रहेंगे.’ उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले का एक छोटा सा इलाका ‘अस्ती’. अमूमन सरकारी स्कूलों का नाम सुनते ही जहन में जर्जर दीवारें और बदहाल व्यवस्था की तस्वीर उभरती है, लेकिन आसिया फारूकी ने अपनी मेहनत से इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है. आज अस्ती का यह सरकारी प्राथमिक विद्यालय किसी महंगे कॉन्वेंट स्कूल को कड़ी टक्कर दे रहा है.
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पेश है आसिया फारूकी के संघर्ष और सफलता की एक प्रेरक कहानी-
- शून्य से शिखर तक का सफर
कहानी शुरू होती है साल 2008 में, जब आसिया फारूकी ने नगर क्षेत्र के अस्ती प्राइमरी स्कूल में बतौर प्रधानाध्यापक कदम रखा. उस वक्त स्कूल की हालत ऐसी थी कि वहां बमुश्किल एक दर्जन बच्चे भी नहीं मिलते थे. संसाधन सीमित थे और लोगों का सरकारी शिक्षा पर से भरोसा उठ चुका था. लेकिन आसिया के इरादे फौलादी थे. उन्होंने तय किया कि वे स्कूल की सूरत और सीरत दोनों बदल कर रहेंगी. - कॉन्वेंट को मात देती ‘स्मार्ट’ शिक्षा
आसिया फारूकी ने केवल किताबी ज्ञान पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास (Holistic Development) को अपना लक्ष्य बनाया. आज इस स्कूल में वह सब कुछ है जो एक आधुनिक इंग्लिश मीडियम स्कूल में होता है:
- डिजिटल क्रांति: स्कूल में ऑनलाइन क्लासेस के लिए हाई-टेक प्रोजेक्टर और इंटरनेट की सुविधा है.
- डिजिटल लाइब्रेरी: बच्चों के लिए एक ऐसी लाइब्रेरी तैयार की गई है जहाँ वे दुनिया भर का ज्ञान उंगलियों की एक ‘क्लिक’ पर पा सकते हैं.
- एक्स्ट्रा एक्टिविटीज: पढ़ाई के साथ-साथ खेल, कला और अन्य गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाता है ताकि बच्चों का आत्मविश्वास बढ़े.
- जब सीएम और राष्ट्रपति ने की सराहना
आसिया की लगन की गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सुनाई दी. उनकी उपलब्धियों का सफरनामा कुछ इस प्रकार है:
2017 राज्य शिक्षा सम्मान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
2023 राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
5 सितंबर 2023 को शिक्षक दिवस के अवसर पर जब दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित किया, तो पूरा फतेहपुर जिला गर्व से झूम उठा.

- अब इंग्लिश मीडियम से यहाँ आ रहे हैं बच्चे
बदलाव का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि जो अभिभावक पहले अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में भेजने के लिए भारी फीस भरते थे, वे अब अपने बच्चों का नाम अस्ती के इस सरकारी स्कूल में लिखा रहे हैं. सहयोगी शिक्षकों का कहना है कि आसिया मैडम हर दिन कुछ नया सिखाने के लिए बच्चों को प्रेरित करती हैं.
- ‘सम्मान नहीं, बढ़ गई है जिम्मेदारी’
आसिया फारूकी का मानना है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा और अच्छे संस्कार देने में उन्हें रूहानी सुकून मिलता है. वे कहती हैं, ‘राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना गर्व की बात है, लेकिन यह अपने साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी लाया है.’
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आसिया फारूकी की यह कहानी साबित करती है कि अगर इरादे नेक हों और जज्बा सच्चा, तो एक अकेला इंसान भी पूरे तंत्र को बदलने की ताकत रखता है. आज फतेहपुर का यह छोटा सा स्कूल देश के हजारों शिक्षकों के लिए एक ‘लाइटहाउस’ की तरह काम कर रहा है.


