UP Politics: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सूबे की सियासत में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है. योगी सरकार के हो चुके मंत्रिमंडल विस्तार के बाद, अब संगठन को नए सिरे से धार देने की कवायद अपने अंतिम और बेहद निर्णायक दौर में पहुंच चुकी है. दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चले मैराथन मंथन के बाद प्रदेश संगठन में नए महामंत्री, उपाध्यक्ष, मंत्रियों और छह क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों पर मुहर लगना लगभग तय माना जा रहा है.
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पश्चिम में गुर्जर, वैश्य समीकरण पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक, पश्चिम क्षेत्र में गुर्जर और वैश्य समीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है, जबकि अवध क्षेत्र में किसी मजबूत ब्राह्मण चेहरे को मौका मिल सकता है. वहीं ब्रज क्षेत्र में शाक्य या लोध समाज से किसी नेता को जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा तेज है. वाराणसी और गोरखपुर क्षेत्रों के नाम भी लगभग तय बताए जा रहे हैं, जबकि कानपुर क्षेत्र में जातीय संतुलन बदलने की रणनीति पर मंथन चल रहा है.
नए मंत्री, 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष के नाम तय
भाजपा प्रदेश इकाई में फिलहाल 45 सदस्य हैं. दिल्ली में हुई बैठक में अन्य राज्यों की तरह प्रदेश संगठन का आकार छोटा करने का सुझाव दिया गया था, लेकिन यूपी इकाई ने चुनावी साल और प्रदेश के विशाल क्षेत्रफल का हवाला देते हुए मौजूदा ढांचे को बरकरार रखने की पैरवी की. हालांकि सात की जगह अब छह महामंत्री बनाए जाने पर सहमति बनती दिख रही है.
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद निगम, आयोग, बोर्ड और प्राधिकरणों में भी बड़े स्तर पर राजनीतिक समायोजन की तैयारी है. पहले चरण में करीब 25 कार्यकर्ताओं के नामों पर चर्चा हुई है. प्रदेश इकाई की औपचारिक घोषणा के बाद इन नामों की सूची भी जारी की जा सकती है.
पार्टी में बढ़ेगी महिलाओं की भूमिका
भाजपा इससे पहले मार्च में 761 नगरीय निकायों में 2805 सभासदों का समायोजन कर बड़ा संगठनात्मक संदेश दे चुकी है. इसके अलावा 98 संगठनात्मक जिलों में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति भी की गई थी. अब पार्टी के भीतर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर है. प्रदेश इकाई और विभिन्न निगमों-आयोगों में एक तिहाई महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का दबाव संगठन पर बढ़ता दिख रहा है.
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प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह की अगुवाई में तैयार हो रही यह नई टीम सिर्फ एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि यह भाजपा का वह चुनावी रथ है जो 2027 के महासंग्राम में उतरने के लिए बिल्कुल तैयार खड़ा है. देखना दिलचस्प होगा कि अनुभव, युवा जोश और सटीक सोशल इंजीनियरिंग का यह कॉकटेल भाजपा को उत्तर प्रदेश के सियासी अखाड़े में कितनी बड़ी बढ़त दिलाता है.
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