बहराइच/बाराबंकी: उत्तर प्रदेश के बहराइच और बाराबंकी के बीच सफर करने वाले लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग-927 (NH-927) को अब फोरलेन में बदलने की तैयारी युद्ध स्तर पर शुरू हो गई है. इस मेगा प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से न केवल दो जिलों के बीच की दूरी और समय कम होगा.
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52 गांवों के किसानों की बदलेगी तकदीर
इस परियोजना से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि क्षेत्र के व्यापार, परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी. फोरलेन निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अनुसार कैसरगंज तहसील के 52 गांवों की भूमि इस परियोजना के दायरे में आएगी. प्रशासन द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद अब प्रभावित किसानों और भू-स्वामियों से दावे और आपत्तियां मांगी जा रही हैं.
बहराइच-बाराबंकी हाईवे होगा फोरलेन
परियोजना से प्रभावित प्रमुख गांवों में चकपिहानी, विजयपुर, करीम बेहड़, अब्दुल्ला बेहड़, देवलखा, अयनी, मेदवापुर, भखरौली कनपुरवा, नरेंद्रपुर, सिदरखा, भकला, रुकनापुर खुर्द, लालपुर जलालपुर और परसेंडी समेत कई गांव शामिल हैं. प्रशासन ने किसानों से भूमि संबंधी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि मुआवजा प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से पूरी की जा सके. वर्तमान में बहराइच-बाराबंकी मार्ग पर बढ़ते यातायात के कारण अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है.
फोरलेन निर्माण के बाद वाहनों की आवाजाही सुगम होगी, यात्रा समय में कमी आएगी और बहराइच से बाराबंकी तथा लखनऊ तक पहुंचना पहले की तुलना में आसान हो जाएगा.
व्यापार और कनेक्टिविटी को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इस परियोजना का सबसे बड़ा लाभ व्यापार क्षेत्र को मिलने की उम्मीद है. माल ढुलाई तेज होने से स्थानीय कारोबारियों, किसानों और उद्योगों को फायदा होगा. बेहतर सड़क संपर्क से निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं. स्थानीय लोगों और प्रशासन का मानना है कि यह फोरलेन परियोजना क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित होगी.
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भूमि अधिग्रहण और अन्य औपचारिकताएं पूरी होने के बाद निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है, जिससे बहराइच और बाराबंकी के बीच आधुनिक और तेज यातायात व्यवस्था का मार्ग प्रशस्त है.


