Gorakhpur Cyber Fraud: उत्तर प्रदेश की गोरखपुर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने ऑनलाइन ठगी के पैसों को खपाने के लिए फर्जी मर्चेंट अकाउंट और QR साउंड बॉक्स का समानांतर नेटवर्क तैयार कर रखा था. पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 1308 QR साउंड बॉक्स, 866 स्कैनर, मोबाइल फोन और बड़ी संख्या में सिम कार्ड बरामद किए हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह बरामदगी प्रदेश में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में शामिल है.
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साइबर पेमेंट सिस्टम की जानकारी का किया गलत इस्तेमाल
जांच में सामने आया है कि गिरोह का सरगना संकेत रॉय पहले BharatPe में काम कर चुका था. नौकरी के दौरान उसने QR कोड, साउंड बॉक्स और डिजिटल बैंकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली को गहराई से समझा. पुलिस के मुताबिक, इसी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल उसने अपराध के लिए किया और बाद में बिहार के सिवान से जुड़े कुछ लोगों के संपर्क में आकर फर्जी मर्चेंट अकाउंट नेटवर्क खड़ा कर लिया.
ऐसे चलता था करोड़ों की ठगी का खेल
पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी लोगों के पैन कार्ड और अन्य पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग कर सामान्य बैंक खातों को मर्चेंट अकाउंट में बदल देते थे. इसके बाद उन्हीं खातों से जुड़े QR साउंड बॉक्स तैयार कर देशभर के साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराए जाते थे. मर्चेंट खातों में अधिक ट्रांजैक्शन सीमा होने के कारण ठगी के पैसों को तेजी से एक खाते से दूसरे खाते में ट्रांसफर किया जाता था, जिससे जांच एजेंसियों के लिए धन के स्रोत तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था.
2500 रुपये प्रति बॉक्स की कमाई
पुलिस जांच में पता चला है कि संकेत रॉय प्रत्येक फर्जी QR बॉक्स के बदले करीब 2500 रुपये वसूलता था. उसके सहयोगी तौहीद आलम और राज सिंह फर्जी मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी तैयार करने का काम करते थे. दोनों को प्रति बॉक्स कमीशन दिया जाता था. जांच में यह भी सामने आया है कि पूरा नेटवर्क एक हिस्ट्रीशीटर के मकान में किराए पर कमरा लेकर संचालित किया जा रहा था. पुलिस अब उस व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर रही है.
1500 से ज्यादा खाते बदले, विदेश भागने की तैयारी
साइबर कमांडो टीम की जांच के अनुसार आरोपी अब तक 1500 से अधिक बैंक खातों को मर्चेंट अकाउंट में बदल चुके थे. इन खातों के जरिए देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी से जुड़े लेनदेन होने की आशंका है. पुलिस का दावा है कि मास्टरमाइंड संकेत रॉय इस अवैध नेटवर्क से भारी रकम जुटाकर विदेश, विशेष रूप से दुबई भागने की तैयारी में था, लेकिन उससे पहले ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया.
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पुलिस का क्या कहना है?
गोरखपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर साइबर अपराधियों को तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा था. फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया गया है. पुलिस संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराने, अन्य राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच करने और फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है.


