Ram Mandir theft Case: अयोध्या राम मंदिर में कथित दान चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह के बाद अब राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरे और धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. संतोष दुबे ने विशेष जांच दल (SIT) को चंपत राय के खिलाफ कथित धांधली, जमीन घोटालों और मूर्तियों को गायब करने से जुड़े 75 से अधिक पन्नों के दस्तावेजी सबूत सौंपे हैं. ये साक्ष्य सीओ सिटी श्रेयस त्रिपाठी के माध्यम से एसआईटी तक पहुंचाए गए हैं. इससे पहले रविवार रात को एसआईटी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संतोष दुबे से लंबी पूछताछ की थी और सोमवार दोपहर तक साक्ष्य जमा करने के निर्देश दिए थे.
8 प्रमुख बिंदुओं पर जांच की मांग, चंपत राय पर गंभीर आरोप
दस्तावेज सौंपने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए धर्मसेना प्रमुख संतोष दुबे ने कहा कि उन्होंने जांच टीम से 8 प्रमुख बिंदुओं पर तफ्तीश करने का अनुरोध किया है. दुबे का आरोप है कि सौंपे गए दस्तावेजों में चंपत राय द्वारा नियमों को ताक पर रखकर खरीदी गई जमीनों और मंदिर परिसर से मूर्तियां गायब करने का पूरा रिकॉर्ड शामिल है.
संतोष दुबे ने एसआईटी की कार्यप्रणाली पर संतोष जताते हुए कहा कि रविवार की बातचीत के बाद लग रहा है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है. चोरों का जेल जाना तय है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पुलिस उनकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं करती है, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और अदालत के जरिए चंपत राय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट ने खुद को बचाने के लिए छोटे चोरों पर तो एफआईआर करा दी, लेकिन बड़े आरोपियों को बचा लिया गया.
मुफ्त मिलने वाले पत्थरों को 5 गुना कीमत पर खरीदने का दावा
संतोष दुबे द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों में सबसे बड़ा आरोप मंदिर निर्माण के लिए खरीदे गए पत्थरों को लेकर है. शिकायत के मुताबिक, राजस्थान के बंशीपहाड़पुर स्थित खदान के मालिक दिलीप राठौर राम मंदिर के लिए पत्थर मुफ्त देने को तैयार थे. लेकिन कथित तौर पर 40% कमीशनखोरी के चक्कर में उनकी पेशकश को ठुकरा दिया गया और ट्रस्ट ने पांच गुना अधिक कीमत पर पत्थर खरीदे. आपको बता दें कि दुबे ने अपने दावों के समर्थन में दिलीप राठौर, दीनानाथ वर्मा और महिपाल सिंह द्वारा सोशल मीडिया व यूट्यूब चैनलों पर दिए गए बयानों और साक्षात्कारों को भी जांच में शामिल करने की मांग की है.
करोड़ों की जमीनों की खरीद में धांधली के सबूत
दस्तावेजों में जमीनों की खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर के आरोप लगाए गए हैं, नियम विरुद्ध कब्जा बयाननामा लिखकर मंदिर की जमीन पर कब्जा करने का आरोप है, जिसके संबंध में हरीशंकर सफरीवाला का प्रार्थना पत्र भी एसआईटी को दिया गया है. एसडीएम कोर्ट में वाद विचाराधीन होने के बावजूद नजूल (सरकारी) की जमीन का नियम विरुद्ध बैनामा कराया गया. आरोप है कि जिस जमीन की कीमत करीब 3 करोड़ रुपये थी, उसे ट्रस्ट ने 23 करोड़ रुपये में खरीदा. इस क्षेत्र में 9 करोड़ रुपये की मालियत वाली जमीन को 55 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि में खरीदकर ट्रस्ट के धन का दुरुपयोग करने का दावा किया गया है.
पीएमओ को भेजी थी शिकायत, अब ट्रस्ट भंग करने और नए गठन की मांग
संतोष दुबे ने बताया कि उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर 16 और 19 जून 2026 को संबंधित अधिकारियों और 21 जून 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भी लिखित शिकायत भेजी थी, लेकिन तब कोई कार्रवाई नहीं हुई. ट्रस्ट पर जनता का भरोसा कम होने का हवाला देते हुए धर्मसेना प्रमुख ने मौजूदा ट्रस्ट को तुरंत भंग करने की मांग की है. इसके साथ ही उन्होंने नए ट्रस्ट के गठन के लिए दो महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं. राम मंदिर आंदोलन में जान गंवाने वाले शहीद कारसेवकों के परिवारों को नए ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व दिया जाए. भगवान श्रीराम सूर्यवंशी थे, इसलिए उनकी परंपरा और भावनाओं का आदर करते हुए ट्रस्ट में कम से कम एक सूर्यवंशी क्षत्रिय प्रतिनिधि को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए. फिलहाल, एसआईटी इन 75 पन्नों के दस्तावेजों और बयानों की कड़ियों को जोड़ने में जुट गई है, जिससे आने वाले दिनों में अयोध्या से लेकर लखनऊ तक की सियासत गरमाने के पूरे आसार हैं.


