Rani Laxmibai Yojana 2026: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की महत्वाकांक्षी ‘रानी लक्ष्मीबाई योजना’ को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है. उच्च शिक्षा प्राप्त कर रही मेधावी छात्राओं का इंतजार अब जल्द ही खत्म होने वाला है. इस योजना के तहत सरकार अब छात्राओं को इलेक्ट्रिक (EV) की जगह पेट्रोल स्कूटी देने की तैयारी कर रही है. योजना के सुचारू संचालन और क्रियान्वयन के लिए सरकार ने करीब ₹400 करोड़ का भारी-भरकम बजट भी निर्धारित कर दिया है.
8500 करोड़ का बड़ा फंड, 125 दिन रोजगार की गारंटी! पश्चिम बंगाल में शुरू हुए 1100 जन कल्याण शिविर
80% अंक और आय सीमा पर मंथन
- योजना की पात्रता और गाइडलाइंस को लेकर शासन स्तर पर मंथन आखिरी दौर में है. प्रारंभिक चर्चा के अनुसार, इस योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित मानक तय किए जा रहे हैं.
- स्नातक (Graduation) प्रथम वर्ष में 80% या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं को मेरिट के आधार पर शॉर्टलिस्ट किया जा सकता है.
- लाभार्थी छात्राओं के परिवार की वार्षिक आय सीमा 10 से 12 लाख रुपये तक निर्धारित करने पर विचार किया जा रहा है.
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि योजना को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेजी से चल रही है और जल्द ही इस पर जमीनी कार्यवाही शुरू कर दी जाएगी. पहले चरण में पूरी तरह मेरिट के आधार पर ही स्कूटी का वितरण किया जाएगा.
इलेक्ट्रिक की जगह पेट्रोल स्कूटी क्यों?
शुरुआती चर्चाओं में इलेक्ट्रिक स्कूटी देने की बात सामने आई थी, लेकिन बुनियादी ढांचे (Charging Infrastructure) और ग्रामीण क्षेत्रों की व्यावहारिक जरूरतों को देखते हुए अब पेट्रोल स्कूटी देने की तैयारी है.
योजना का मुख्य उद्देश्य: ग्रामीण और दूरस्थ (रिमोट) क्षेत्रों से कॉलेज आने-जाने वाली छात्राओं की राह आसान करना है. अक्सर सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) की कमी और कॉलेज की दूरी की वजह से छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होती है. पेट्रोल स्कूटी मिलने से उनकी यह निर्भरता खत्म होगी और समय की बचत होगी.
वॉटर वॉर’ की आहट? ब्रह्मपुत्र पर चीन का मेगा-डैम, भारत के लिए क्यों है बड़ा खतरा
छात्राओं में भारी उत्साह
इस घोषणा के बाद से ही कॉलेज जाने वाली छात्राओं, विशेषकर ग्रामीण परिवेश की बेटियों में जबरदस्त उत्साह है. छात्राओं का मानना है कि खुद का वाहन होने से वे बिना किसी डर या देरी के समय पर कॉलेज पहुंच सकेंगी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगी. सरकार के इस कदम को राज्य में महिला सशक्तिकरण और बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है.


