नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने साउथ ईस्टर्न रेलवे (South Eastern Railway) के डिजिटल संचार नेटवर्क को मजबूत करने के लिए 48-फाइबर ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 200 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना के तहत लगभग 1,600 रूट किलोमीटर में हाई-स्पीड फाइबर नेटवर्क बिछाया जाएगा, जिससे रेलवे की संचार व्यवस्था और परिचालन क्षमता को नई मजबूती मिलेगी.
रेल मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना रेलवे के सुरक्षित, आधुनिक और तकनीक आधारित संचालन को समर्थन देने के साथ भविष्य की डिजिटल आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी.
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किन रेलवे डिवीजनों में होगा काम?
स्वीकृत परियोजना के तहत साउथ ईस्टर्न रेलवे के चार प्रमुख मंडलों में 48-फाइबर OFC नेटवर्क स्थापित किया जाएगा:
- आद्रा (Adra) डिवीजन
- चक्रधरपुर (Chakradharpur) डिवीजन
- खड़गपुर (Kharagpur) डिवीजन
- रांची (Ranchi) डिवीजन
इन सभी डिवीजनों को आधुनिक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़कर रेलवे की संचार प्रणाली को अधिक विश्वसनीय और तेज बनाया जाएगा.
परियोजना से क्या होंगे फायदे?
रेल मंत्रालय के अनुसार, नई OFC परियोजना से कई महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे:
- रेलवे के डिजिटल कम्युनिकेशन नेटवर्क को मजबूती मिलेगी.
- सिग्नलिंग और परिचालन संचार अधिक विश्वसनीय होगा.
- आधुनिक रेलवे तकनीकों को लागू करने में मदद मिलेगी.
- परिचालन दक्षता और सुरक्षा में सुधार होगा.
- भविष्य में रेलवे नेटवर्क के विस्तार के लिए मजबूत डिजिटल आधार तैयार होगा.
डिजिटल रेलवे मिशन को मिलेगा बढ़ावा
भारतीय रेलवे लगातार अपनी संचार और तकनीकी व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर काम कर रहा है. 48-फाइबर OFC नेटवर्क के विस्तार से डेटा ट्रांसमिशन क्षमता बढ़ेगी और विभिन्न डिजिटल सेवाओं को बेहतर समर्थन मिलेगा.
रेल मंत्रालय का कहना है कि यह परियोजना साउथ ईस्टर्न रेलवे के लिए एक मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी, जिससे भविष्य में नई तकनीकों को लागू करना और रेल सेवाओं का विस्तार करना आसान होगा.
Source: Ministry Of Railways


