अयोध्या स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) से 5 वर्षीय BA LLB और 3 वर्षीय LLB पाठ्यक्रमों की मान्यता मिल गई है. विश्वविद्यालय ने 2026 सत्र से दोनों कोर्स शुरू करने के साथ प्रवेश प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी है. कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने इसे विश्वविद्यालय की बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश और देश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा का नया अवसर मिलेगा.
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विश्वविद्यालय को ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अग्रणी भूमिका में देखना चाहते
कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि विधि (कानून) किसी भी जीवंत समाज की आत्मा होती है. आज के वैश्विक परिदृश्य में विधिक शिक्षा बहुत आवश्यक हो गई है. अवध विश्वविद्यालय के विधि विभाग में एलएलएम के साथ-साथ अब बी.ए. एलएल.बी. और एलएलबी पाठ्यक्रमों की शुरुआत संस्थान को विधिक शिक्षा के एक संपूर्ण राष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करेगी. बार काउंसिल ऑफ इंडिया से प्राप्त यह मान्यता हमारे हर्ष का विषय है, जिसके तहत हम अवध विश्वविद्यालय को ‘विकसित भारत’ के निर्माण में अग्रणी भूमिका में देखना चाहते हैं. यह रिकॉर्ड समय में मिली सफलता टीम वर्क, निरंतर विवि परिवार के कड़े परिश्रम का प्रतिफल है. हम अकादमिक उत्कृष्टता और शोध परक विधिक शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों के भविष्य को उज्ज्वल बनाने के लिए संकल्पित हैं. सभी नवागंतुक छात्र-छात्राओं का इस नए शैक्षिक अध्याय में स्वागत है.
कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के विधि विभाग में वर्ष 2018 से एलएलएम पाठ्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है. अब वर्ष 2026 से पंचवर्षीय बी.ए. एलएल.बी. एवं त्रिवर्षीय एलएल.बी. पाठ्यक्रमों के शुभारंभ से विभाग विधि शिक्षा के समस्त प्रमुख शैक्षिक आयामों से समृद्ध होकर पूर्णता की ओर अग्रसर हुआ है. यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के शैक्षिक इतिहास में एक नवीन अध्याय का सूत्रपात करेगी तथा प्रदेश एवं देश के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगी.
सेंटर फॉर लीगल स्टडीज के निदेशक के तौर पर नियुक्त प्रो. ए के राय ने कहा कि प्रखर प्रवक्ता, महान विधिवेत्ता, लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थक एवं विलक्षण मनीषी डॉ०राममनोहर लोहिया के नाम से अभिहित इस विश्वविद्यालय में विधि शिक्षा के इन नवीन पाठ्यक्रमों का संचालन निःसंदेह अत्यंत गौरव, संतोष एवं शैक्षिक गरिमा का विषय है. यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की अकादमिक उत्कृष्टता, गुणवत्ता-संपन्न विधि शिक्षा तथा राष्ट्रीय स्तर पर उसकी प्रतिष्ठा को और अधिक सुदृढ़ करेगी.
उपकुलसचिव ए के गौतम की महत्वपूर्ण भूमिका नोडल अधिकारी के रूप में रही जिन्होंने एक रिकॉर्ड समय में इस प्रकिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया. इस महत्त्वपूर्ण सफलता पर विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष का वातावरण व्याप्त है. विश्वविद्यालय के समस्त प्राधिकारियों, अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए एक-दूसरे को शुभकामनाएँ प्रेषित की हैं तथा इसे विश्वविद्यालय की सामूहिक प्रतिबद्धता, समर्पण एवं सतत् प्रयासों का प्रतिफल बताया है. इस अवसर पर वित्त अधिकारी पूर्णेन्दु शुक्ल प्रो एस एस मिश्र, प्रो हिमांशु शेखर सिंह, प्रो एस के रायजादा, प्रो नीलम पाठक, प्रो शैलेंद्र कुमार वर्मा, प्रो शैलेंद्र कुमार, प्रो विनोद कुमार श्रीवास्तव, डॉ. विनोद कुमार चौधरी, उप कुलसचिव डॉ. रीमा श्रीवास्तव, ए के गौतम, डॉ गीतिका श्रीवास्तव, सहायक कुलसचिव बजरंगबली, डॉ. दिनेश कुमार सिंह, सत्येंद्र डॉ इत्येंद्र पाल सिंह, डॉ राजेश कुमार सिंह आदि उपस्थित रहे.
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दोनों नवीन पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश प्रक्रिया आज से प्रारंभ कर दी गई है. इच्छुक अभ्यर्थी विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रवेश हेतु आवेदन कर सकते हैं.


