लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य राजधानी क्षेत्र (UPSCR)-2051 योजना के तहत प्रदेश की राजधानी और उसके आसपास के इलाकों की सूरत बदलने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना का प्रस्ताव तैयार किया गया है. इसके अंतर्गत 305 किलोमीटर लंबा, छह लेन (Six-Lane) का एक रीजनल सर्कुलर एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जिसे ‘राज्य राजधानी माला’ नाम दिया गया है.
इस महापरियोजना का मुख्य उद्देश्य लखनऊ शहर को रोजाना के भारी ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए मुक्ति दिलाना और इसके पड़ोसी जिलों बाराबंकी, रायबरेली, उन्नाव, सीतापुर और हरदोई के बीच कनेक्टिविटी को बेहद मजबूत करना है. रुपये 17,045 करोड़ की भारी-भरकम अनुमानित लागत वाले इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र में लॉजिस्टिक्स, माल ढुलाई और भविष्य के शहरी विकास को एक नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है.
दो चरणों (Phases) में पूरा होगा निर्माण कार्य
दक्षिणी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (Southern Peripheral Expressway)
यह हिस्सा रायबरेली के लालगंज से शुरू होकर बाराबंकी के नवाबगंज को जोड़ेगा. इसकी कुल लंबाई 106 किलोमीटर होगी. इस चरण पर रुपये 5,865 करोड़ खर्च होने का अनुमान है और इसे साल 2026 से 2031 के बीच पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.इसके तहत 83 किमी की मौजूदा दो-लेन सड़कों को सिक्स-लेन में बदला जाएगा, जबकि 8 किमी की फोर-लेन सड़कों को सिक्स-लेन में अपग्रेड किया जाएगा. इसके अलावा, 15 किमी का बिल्कुल नया रोड अलाइनमेंट (नया रास्ता) तैयार किया जाएगा. ट्रकों की सुचारू आवाजाही के लिए 4 बड़े ‘ले-बाय’ (Truck Lay-bys) बनाए जाएंगे, जिनमें से प्रत्येक में 50 से 100 ट्रकों की पार्किंग की आधुनिक व्यवस्था होगी.
उत्तरी पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (Northern Peripheral Expressway)
यह चरण बाराबंकी के नवाबगंज को सीतापुर और हरदोई से जोड़ेगा. इसकी कुल लंबाई 199 किलोमीटर होगी. इसकी अनुमानित लागत रुपये 11,180 करोड़ तय की गई है और इसे साल 2031 से 2040 के बीच धरातल पर उतारने की योजना है. इसमें 140 किमी की दो-लेन सड़कों का चौड़ीकरण किया जाएगा, 7 किमी की फोर-लेन सड़क को अपग्रेड किया जाएगा और 52 किमी का नया रोड अलाइनमेंट तैयार किया जाएगा. इस फेज में भी भारी वाहनों के लिए 5 नए ट्रक ले-बाय बनाए जाएंगे, जिनकी क्षमता 50 से 100 ट्रक प्रति ले-बाय होगी.
आखिर क्यों पड़ी ‘राज्य राजधानी माला’ की जरूरत?
लखनऊ-बाराबंकी: रोजाना लगभग 50,000 ट्रिप.
लखनऊ-उन्नाव और लखनऊ-संडीला: रोजाना 40,000 – 40,000 ट्रिप.
उन्नाव-रायबरेली: रोजाना 35,000 ट्रिप.
सीतापुर-हरदोई: रोजाना 33,000 ट्रिप.
रायबरेली-बाराबंकी: रोजाना 23,000 ट्रिप.
शहर को मिलेगी बड़ी राहत
इस एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद बाहर से आने-जाने वाला भारी ट्रैफिक (Through Traffic) लखनऊ शहर के मुख्य रास्तों के अंदर घुसे बिना, बाहर से ही (बायपास करते हुए) अपने गंतव्य की ओर निकल जाएगा. इससे लखनऊ वासियों को प्रदूषण और जाम दोनों से बड़ी राहत मिलेगी.
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बड़े विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारी, रणनीति भी तैयार
इस विशाल कॉरिडोर को समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए जमीन अधिग्रहण और निर्माण की कमान देश और प्रदेश की बड़ी एजेंसियों को सौंपी गई है. इसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), लोक निर्माण विभाग (PWD) और उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद मिलकर काम करेंगे.


