देश में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ बुधवार को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हो गया. इससे पहले मंगलवार को इस विधेयक पर करीब 9 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई थी.
विधेयक पारित होने के बाद लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई.
लोकसभा में ध्वनिमत से पारित हुआ विधेयक
सरकार का कहना है कि यह संशोधन विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से लाया गया है.
मंगलवार को विधेयक पर लंबी चर्चा के बाद बुधवार को इसे सदन में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया.
सदन में राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के बीच हुई तीखी नोकझोंक
बुधवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयानों पर आपत्ति जताई.
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने हमेशा छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं मजबूत बनाने के लिए लगातार कदम उठाए हैं.
राहुल गांधी ने छात्रों की भावनाओं का उठाया मुद्दा
विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने लगभग 50 मिनट तक अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मामलों को लेकर छात्रों में केवल गुस्सा ही नहीं, बल्कि गहरी भावनाएं जुड़ी हुई हैं.
हालांकि, सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने विधेयक के प्रावधानों और परीक्षा सुधारों पर चर्चा करने के बजाय सरकार पर आरोप लगाने पर अधिक जोर दिया.
असंसदीय शब्दों को लेकर सदन में हुआ हंगामा
राहुल गांधी के भाषण के दौरान कथित असंसदीय शब्दों के इस्तेमाल को लेकर सदन में कई बार आपत्ति दर्ज कराई गई.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने संसदीय नियमों का हवाला देते हुए राहुल गांधी से माफी मांगने की बात कही.
वहीं लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सदन की मर्यादा बनाए रखने की सलाह दी. बाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आग्रह पर कुछ शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटा दिया गया.
पीयूष गोयल ने साधा निशाना
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी की आलोचना करते हुए कहा कि उनके भाषण में विधेयक और उससे जुड़े प्रावधानों पर कोई ठोस चर्चा नहीं हुई.
उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा वक्तव्य सरकार पर आरोप लगाने तक सीमित रहा, जबकि चर्चा का मुख्य विषय परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक रोकने के उपाय थे.
स्रोत: लोकसभा की कार्यवाही.


