Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने पतरातू-रामगढ़ फोरलेन सड़क परियोजना के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर प्रभावित रैयतों (भू-स्वामियों) को एक बड़ी राहत दी है. बता दें कि जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की अदालत ने रैयतों द्वारा दायर प्रथम अपीलों पर सुनवाई करते हुए मुआवजे की राशि को 1 करोड़ रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 2.63 करोड़ प्रति एकड़ (2,63,375 प्रति डिसमिल रुपये) करने का आदेश दिया है.
निचली अदालत के फैसले में संशोधन
अदालत ने हजारीबाग के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण (LARRA) के पूर्व फैसले में संशोधन किया. हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि निचली अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों और बिक्री विलेखों (सेल डीड) का समुचित मूल्यांकन किए बिना केवल सामान्य आधार पर मुआवजा तय कर दिया था, जो कि एक अधूरा और त्रुटिपूर्ण निर्णय था.
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला रामगढ़ जिले के पोचरा मौजा की जमीनों से जुड़ा है, जिन्हें वर्ष 2018-19 में पतरातू डैम से रामगढ़ तक फोरलेन सड़क निर्माण एवं चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित किया गया था. जिला भूमि अधिग्रहण पदाधिकारी ने प्रारंभ में 88.69 लाख प्रति रुपये एकड़ मुआवजा तय किया था. रैयतों की आपत्ति के बाद हजारीबाग की एलएआरआरए (LARRA) अदालत ने इसे बढ़ाकर 1 करोड़ प्रति एकड़ रुपये किया. इस राशि से असंतुष्ट होकर राजेंद्र राम व अन्य प्रभावित रैयतों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
हाईकोर्ट की मुख्य टिप्पणियां और गणना का आधार
अदालत ने स्पष्ट किया कि ‘भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013’ की धारा 26 के अनुसार बाजार मूल्य तय करने के लिए पिछले तीन वर्षों के पंजीकृत बिक्री विलेखों में से सर्वोच्च मूल्य वाले आधे बिक्री विलेखों का औसत निकाला जाना चाहिए. हाईकोर्ट ने कहा कि यह गणना पद्धति पूर्व में भी अपनाई जा चुकी है, जिसे उच्चतम न्यायालय ने भी बरकरार रखा था. अदालत ने माना कि अधिग्रहित जमीन मुख्य सड़क के किनारे, रामगढ़ कैंटोनमेंट क्षेत्र के निकट और पूरी तरह विकसित इलाके में स्थित है, जहां बिजली, सड़क, अस्पताल और विद्यालय जैसी सभी शहरी सुविधाएं उपलब्ध हैं.
मिलेंगे सभी वैधानिक लाभ
सभी अपीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि प्रभावित भू-स्वामियों को संशोधित दर (2,63,375 प्रति डिसमिल रुपये) के आधार पर ही 2013 के कानून के तहत मिलने वाले अन्य सभी वैधानिक लाभ, जैसे सोलेशियम (Solatium) और ब्याज की राशि भी प्रदान की जाए.


