Pradeep Rawat Death: ‘गजनी’, ‘लगान’ और ‘सरफरोश’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपने दमदार अभिनय की छाप छोड़ने वाले खूंखार विलेन प्रदीप रावत का मंगलवार को देहांत हो गया. पर हाल ही में अपने फिल्मी सफर और आमिर खान के साथ अपने खास रिश्ते को लेकर कई दिलचस्प खुलासे किए. बता दें कि टीवी धारावाहिक ‘महाभारत’ में ‘अश्वत्थामा’ का किरदार निभाकर घर-घर में मशहूर हो गए थे, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे हिंदी सिनेमा के मुकाबले दक्षिण भारतीय (साउथ) फिल्मों में काम करना ज्यादा क्यों पसंद करते हैं.
क्यों आर्मी में जाना चाहते थे प्रदीप रावत?
बहुत ही कम लोगों को पता होगा प्रदीप रावत मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे. उनके के पिता भारतीय सेना में अधिकारी थे, जिससे प्रेरित होकर उन्होंने भी आर्मी में जाना चाहते थे. हालांकि, कई बार उन्होंने आर्मी में जाने की कोशिश पर हो नहीं सकता. इसके बाद उन्होंने जबलपुर में एक बैंक में नौकरी शुरू की.
बैंक की दिनचर्या में मन न लगने के कारण वे राज बब्बर के मशहूर थिएटर ग्रुप ‘एकजुट’ से जुड़ गए. रंगमंच पर अभिनय की बारीकियां सीखने के बाद साल 1985 में उन्होंने फिल्म ‘मेरी जंग’ से बॉलीवुड में पर्दापण किया. इसके बाद उन्होंने ‘अग्निपथ’, ‘बागी’, ‘कोयला’ और ‘मेजर साहब’ जैसी कई बड़ी फिल्मों में सहायक भूमिकाएं निभाईं.
आमिर खान ने खुद फोन कर दिया था ‘लगान’ का ऑफर
प्रदीप रावत और आमिर खान की बॉन्डिंग बॉलीवुड में काफी खास मानी जाती है. सिद्धार्थ कानन के चैट शो में प्रदीप ने बताया कि फिल्म ‘लगान’ में ‘देवा’ का रोल पहले अभिनेता मुकेश ऋषि करने वाले थे. लेकिन मुकेश ऋषि के साउथ फिल्मों में व्यस्त होने के कारण आमिर खान ने खुद प्रदीप रावत को फोन करके इस किरदार का प्रस्ताव दिया था.
वहीं, सुपरहिट फिल्म ‘गजनी’ के हिंदी रीमेक के लिए निर्देशक को आमिर खान का नाम प्रदीप रावत ने ही सुझाया था. प्रदीप पहले से ही साउथ में बनी मूल ‘गजनी’ में मुख्य विलेन का रोल कर चुके थे, जिसके बाद उनके कहने पर हिंदी रीमेक में आमिर खान को कास्ट किया गया.
हिंदी फिल्मों से क्या थी शिकायत?
साउथ सिनेमा में अधिक सक्रिय रहने की वजह बताते हुए प्रदीप रावत ने हिंदी फिल्म उद्योग की कार्यप्रणाली पर खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि साउथ सिनेमा में कलाकारों को उनका मेहनताना समय पर मिलता है. हिंदी फिल्मों की तुलना में साउथ की इंडस्ट्री कलाकारों को लगभग तीन गुना ज्यादा फीस देती है.
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साउथ इंडस्ट्री में कलाकारों के काम और उनके समय का काफी सम्मान किया जाता है, जबकि हिंदी सिनेमा में अक्सर भुगतान में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है. तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और उड़िया जैसी कई भाषाओं की 150 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके प्रदीप रावत आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली खलनायक अभिनेताओं में से एक माने जाते हैं.


