UPI payment charges: यदि आप गूगल पे (Google Pay), फोनपे (PhonePe), पेटीएम (Paytm) या किसी अन्य ऐप के जरिए यूपीआई (UPI) से लेनदेन करते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है. आने वाले समय में UPI के जरिए होने वाले डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या शुल्क लग सकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में ‘भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम’ (Payment and Settlement Systems Act) में संशोधन विधेयक पेश किया है. इस प्रस्तावित बदलाव के बाद डिजिटल पेमेंट पर मर्चेंट शुल्क (MDR) लागू करने का कानूनी आधार तैयार हो जाएगा.
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आम उपभोक्ताओं पर नहीं, व्यापारियों पर पड़ेगा असर
प्रस्तावित नियमों के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि शुल्क का बोझ आम ग्राहकों या उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा, बल्कि यह व्यापारियों (Merchants) पर लगेगा. हालांकि, बड़े स्तर पर लागू होने वाला यह बदलाव डिजिटल पेमेंट की रफ्तार और व्यापारी व्यवहार को प्रभावित कर सकता है.
सरकार और नीति निर्माताओं के पास 2 बड़े विकल्प
सूत्रों और रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार दो प्रमुख विकल्पों पर विचार कर रही है. एक तय सीमा से अधिक के लेनदेन पर MDR लगाया जाए. व्यापारी के सालाना कारोबार (Turnover) के हिसाब से शुल्क की दर तय की जाए.
प्रस्तावित चार्ज का ढांचा
₹1.5 करोड़ से अधिक वाले बड़े व्यापारी. ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.3% से 0.5% तक MDR लगाने का प्रस्ताव है. आम उपभोक्ताओं और छोटे दुकानदारों के लिए UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा.
क्यों पड़ी UPI पर शुल्क लगाने की जरूरत?
UPI इस समय दुनिया के सबसे बड़े रियल-टाइम पेमेंट नेटवर्कों में से एक है (अकेले जुलाई में 23.6 अरब लेनदेन, जिनकी कीमत ₹29.9 लाख करोड़ थी). इसमें PhonePe और Google Pay का दबदबा है. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि UPI पेमेंट पर कोई शुल्क न मिलने के कारण फिनटेक और पेमेंट कंपनियों की कमाई सीमित हो गई है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा में नए निवेश को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो रहा है.
MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) क्या होता है?
MDR वह शुल्क है जो व्यापारी (दुकानदार) बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के बदले देते हैं. लगभग 1.5% तक MDR लगता है. लगभग 0.9% तक शुल्क होता है. अभी व्यापारियों से 0% शुल्क लिया जाता है. फिलहाल शुल्क की अंतिम दरों और नियमों को लेकर आधिकारिक घोषणा होनी बाकी है. वित्त मंत्रालय, RBI और NPCI की तरफ से अंतिम गाइडलाइंस जारी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ होगी.


